News Saga Desk
रांची रेल मंडल में ट्रेन सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय रेलवे की स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ को लागू करने के लिए सर्वेक्षण कार्य शुरू कर दिया गया है। इस प्रणाली के लागू होने से मानवीय भूल से होने वाली रेल दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी और ट्रेन संचालन पहले से ज्यादा सुरक्षित होगा।
डीआरएम करुणानिधि सिंह ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा भारतीय रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ट्रेनों की टक्कर और सिग्नल की अनदेखी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए देशभर में कवच प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। इसी क्रम में रांची रेल डिवीजन में भी इसका सर्वे शुरू किया गया है। यह प्रणाली लोको पायलट को रीयल-टाइम चेतावनी देती है और जरूरत पड़ने पर स्वतः ट्रेन की गति नियंत्रित कर देती है।
इन रूटों पर लगेगा कवच
कवच प्रणाली रांची, आद्रा, खड़गपुर और चक्रधरपुर मंडलों के अंतर्गत आने वाले प्रमुख रेलखंडों पर स्थापित की जाएगी। इसमें रांची-टोरी, खड़गपुर-आद्रा, आसनसोल-आद्रा-चांडिल, पुरुलिया-कोटशिला-मुरी और कोटशिला-बोकारो स्टील सिटी सेक्शन शामिल हैं। इन सभी रूटों की कुल लंबाई करीब 1563 किलोमीटर है।
कैसे बढ़ेगी ट्रेन सुरक्षा
रेलवे अधिकारियों के अनुसार कवच प्रणाली रेडियो संचार और उन्नत सिग्नल तकनीक पर आधारित है। यदि किसी ट्रेन के सामने या पीछे निर्धारित दूरी में दूसरी ट्रेन मौजूद होती है या लोको पायलट सिग्नल की अनदेखी करता है, तो यह सिस्टम स्वतः अलर्ट देता है। प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर ट्रेन को अपने आप रोकने की क्षमता भी इसमें मौजूद है।
कवच प्रणाली सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4 प्रमाणित है, जो किसी भी सुरक्षा तकनीक का सर्वोच्च मानक माना जाता है। यह 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक चलने वाली ट्रेनों के लिए अनुमोदित है और आमने-सामने की टक्कर, पीछे से टक्कर और सिग्नल उल्लंघन जैसी तीन प्रमुख जोखिम स्थितियों में प्रभावी रूप से काम करती है। इसके लागू होने से रांची रेल मंडल में ट्रेन संचालन कहीं अधिक सुरक्षित होने की उम्मीद है।
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