NEWS SAGA DESK
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को छठवें रामनाथ गोयनका व्याख्यान में दिए गए अपने भाषण को साझा करते हुए देशवासियों से अपील की कि अगले दस वर्षों में गुलामी की मानसिकता से पूरी तरह मुक्त होने का सामूहिक संकल्प लिया जाए। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक सोच देश पर उपनिवेशवाद के दौर की देन है और अब समय आ गया है कि भारत इससे पूरी तरह बाहर निकले। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि रामनाथ गोयनका का जीवन राष्ट्रप्रथम की भावना और सत्यनिष्ठा का अद्वितीय उदाहरण रहा है। उन्होंने हमेशा कर्तव्य को सर्वोपरि रखा, जो आज भी लोकतंत्र और पत्रकारिता दोनों के लिए प्रेरणा स्रोत है। लोकतंत्र पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने बिहार विधानसभा चुनाव का उल्लेख किया और कहा कि रिकॉर्ड मतदान तथा महिलाओं की बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत का लोकतंत्र लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का विकास मॉडल आज दुनिया के लिए आशा और प्रेरणा का प्रतीक बन चुका है। देश की आर्थिक मजबूती और सामाजिक परिवर्तन वैश्विक स्तर पर एक मिसाल की तरह देखे जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि चुनाव जीतने का मंत्र जनता की भावनाओं को समझने में है, न कि हमेशा चुनावी मोड में बने रहने में। माओवाद पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश में इसका प्रभाव तेजी से घट रहा है, जो भारत के विकास, प्रगति और सुरक्षा के लिए अत्यंत सकारात्मक संकेत है।
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