TOD ट्रेनों पर रेलवे की सख्ती, बिना अनुमति अब नहीं चलेंगी स्पेशल ट्रेनें

News Saga Desk

रांची: भारतीय रेलवे ने ट्रेन ऑन डिमांड (TOD) यानी विशेष ट्रेनों के संचालन को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अब कोई भी TOD ट्रेन बिना एन-रूट (रास्ते में पड़ने वाले) और अंतिम स्टेशन वाली रेलवे की पूर्व अनुमति के घोषित या संचालित नहीं की जाएगी। इस आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश सभी जोनल रेलवे को दिए गए हैं।

रेलवे बोर्ड के अनुसार, कुछ स्थानों पर बिना अनुमति TOD ट्रेनें चला दी गई थीं, जिसके कारण कई ट्रेनें शुरुआती स्टेशन से ही देरी से रवाना हुईं और यात्रियों की शिकायतें बढ़ीं। इसी को ध्यान में रखते हुए अब नियमों को और सख्त किया गया है।

रेलवे के प्रमुख निर्देश

रेलवे ने TOD ट्रेनों के संचालन को लेकर कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत एन-रूट और टर्मिनेटिंग रेलवे की सहमति के बिना कोई भी TOD ट्रेन नहीं चलाई जाएगी। त्योहार, परीक्षाओं और छुट्टियों के दौरान यात्रियों की संभावित भीड़ का अनुमान पहले से लगाकर समय पर योजना बनाने को कहा गया है। TOD से जुड़े प्रस्तावों का COIS पोर्टल पर त्वरित निपटारा करना होगा।

इसके अलावा, जिन रूटों पर नॉन-इंटरलॉकिंग (NI) या अन्य निर्माण कार्य चल रहे हों, वहां सामान्य परिस्थितियों में TOD ट्रेनें नहीं चलाई जाएंगी। केवल आपात स्थिति में, अचानक भीड़ बढ़ने पर फोन के जरिए अनुमति लेकर अनारक्षित ट्रेन चलाने की छूट दी जा सकती है। हालांकि, किसी भी परिस्थिति में बिना NOC के आरक्षित TOD ट्रेन चलाने की अनुमति नहीं होगी।

TOD को लेकर नई व्यवस्था

रेलवे ने TOD ट्रेनों के संचालन के लिए एक नई और सरल व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। अब तक TOD ट्रेनें अलग-अलग नामों जैसे RTOD, क्लोन ट्रेन, एक्स्ट्रा रश और त्योहार विशेष के नाम से चलाई जाती थीं, जिससे रिकॉर्ड और प्रबंधन में दिक्कतें आती थीं।

नई व्यवस्था के तहत 28 फरवरी 2026 के बाद चलने वाली सभी मौजूदा TOD मंजूरियां स्वतः समाप्त हो जाएंगी। 1 मार्च 2026 से TOD ट्रेन चलाने के लिए जोनल रेलवे को नई मंजूरी लेनी होगी। साथ ही, TOD से जुड़े प्रस्ताव 7 दिनों के भीतर भेजने का प्रावधान किया गया है, ताकि समय पर स्वीकृति मिल सके।

TOD ट्रेनों की श्रेणियां

  • मार्च: होली विशेष
  • 15 अप्रैल से 15 जुलाई: ग्रीष्मकालीन (समर)
  • अक्टूबर–नवंबर: पूजा विशेष
  • 15 दिसंबर से 10 जनवरी: शीतकालीन (विंटर)
  • अन्य समय: अतिरिक्त भीड़ (एक्स्ट्रा रश)

यात्रियों को होगा फायदा

रेलवे का कहना है कि नई व्यवस्था से ट्रेन संचालन ज्यादा पारदर्शी और सुव्यवस्थित होगा। त्योहारों और व्यस्त समय में यात्रियों के लिए बेहतर योजना बन सकेगी। इसके साथ ही रेलवे का डेटा प्रबंधन आसान होगा और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त ट्रेनें समय पर चलाई जा सकेंगी। रेलवे को उम्मीद है कि इन फैसलों से यात्रियों को बेहतर और समय पर सुविधाएं मिलेंगी।

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