Ravi Shastri : 45 साल के क्रिकेट सफर, कोचिंग दबाव, टीम की जिम्मेदारी और 2027 वर्ल्ड कप पर बड़ा बयान

News Saga Desk

भारतीय क्रिकेट का एक मजबूत स्तंभ—रवि शास्त्री। खिलाड़ी, कमेंटेटर और फिर टीम इंडिया के हेड कोच तक का सफर उनकी पहचान का बड़ा हिस्सा रहा। 1981 से 1992 तक भारतीय टीम के लिए खेलते हुए उन्होंने खुद को एक दमदार ऑलराउंडर के रूप में स्थापित किया। बाद में बतौर कोच (2017-2021) शास्त्री टीम इंडिया की रणनीति और सफलता के प्रमुख चेहरा बने। वर्तमान में वह कमेंट्री के ज़रिए क्रिकेट की धड़कन से जुड़े हैं। प्रभात खबर से खास बातचीत में शास्त्री ने अपने क्रिकेट सफर, कोचिंग चुनौतियों, खिलाड़ियों के मानसिक संतुलन और भारतीय टीम की वर्तमान स्थिति पर खुलकर बात की।

“पिछले 5 वर्षों में भारत ने शानदार क्रिकेट खेला”

रवि शास्त्री का मानना है कि हाल के पांच वर्षों में भारतीय टीम ने बेहतरीन स्तर का क्रिकेट दिखाया है। उन्होंने बताया कि कोचिंग का सफर आसान नहीं था—यह जिम्मेदारी, दबाव, उम्मीदों और परफॉर्मेंस के बीच संतुलन का खेल था। “एक मैच हारो तो आलोचना तय, जीत मिल जाए तो उम्मीदें बढ़ती जाती हैं,” शास्त्री ने कहा।

झारखंड से शुरू हुई जर्नी–17 की उम्र में रणजी

उन्होंने याद किया कि कैसे क्रिकेट की उनकी शुरुआत तत्कालीन बिहार (अब झारखंड) में हुई। 17 साल के शास्त्री ने जमशेदपुर रणजी ट्रॉफी से करियर शुरू किया। उस समय बिहार की टीम बेहद मजबूत थी और उनकी मां का पटना विमेंस कॉलेज से संबंध भी भावनात्मक जुड़ाव का हिस्सा रहा।

“खराब प्रदर्शन पर टीम से बाहर भी किया जा सकता है”

शास्त्री ने स्पष्ट कहा—क्रिकेट में स्थान स्थायी नहीं। प्रदर्शन खराब हो तो जगह छिन सकती है। ऐसे समय में मैन मैनेजमेंट और कम्युनिकेशन सबसे बड़ा हथियार है। यही नेतृत्व उन्हें कोचिंग के दौरान मजबूत बनाता रहा।

“1983 वर्ल्ड कप ने सब कुछ बदल दिया”

उन्होंने कहा कि 1983 की जीत ने भारत में क्रिकेट की सोच और इज़्ज़त दोनों बदल दी। लॉर्ड्स में मिली उस विजय ने टीम India के लिए वैश्विक सम्मान का दरवाजा खोल दिया।

SA & NZ सीरीज़ पर कहा – ये टीम गेम है, एक की नहीं ज़िम्मेदारी पूरे समूह की

शास्त्री ने साफ किया कि हार में किसी एक खिलाड़ी को जिम्मेदार ठहराना गलत है। जीत और हार दोनों टीम के सामूहिक प्रदर्शन का हिस्सा हैं।

चयन और खिलाड़ियों पर बड़ा बयान

शास्त्री ने कहा कि टीम कॉम्बिनेशन तय करना चयनकर्ताओं की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि बुमराह जैसे खिलाड़ी just white-ball bowler माने जा रहे थे, लेकिन आज वही red-ball cricket में विश्व के सबसे जानलेवा गेंदबाज़ हैं।

उनके शब्द—“बुमराह दादा है!”

सबसे आइकॉनिक भारतीय खिलाड़ी?

उनके अनुसार—
पिछले दशक में विराट कोहली टेस्ट फॉर्मेट के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ी रहे हैं
जसप्रीत बुमराह ऑल-फॉर्मेट के विश्वस्तरीय तेज़ गेंदबाज़ हैं

मानसिक ताकत और 6 छक्कों की घटना

एक ओवर में छह छक्के जड़ने के अनुभव पर शास्त्री बोले—ऐसे पल सिर्फ अभ्यास, माइंडसेट और दबाव में धैर्य से पैदा होते हैं।

क्या रोहित-कोहली 2027 वर्ल्ड कप खेलेंगे?

उन्होंने कहा—सबकुछ फिटनेस और रन की भूख पर निर्भर करेगा। उम्र नहीं, भूख तय करती है करियर की लंबाई।
“ये दोनों दादा खिलाड़ी हैं—व्हाइट-बॉल क्रांति के सेंटर पॉइंट।”

महिला टीम की वर्ल्ड कप जीत पर बोलते हुए

उन्होंने गर्व से कहा कि उन्होंने पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी—भारतीय महिला टीम दूर नहीं है। जेमिमा रोड्रिग्स की तारीफ करते हुए कहा—“जेमिमा एक जेम है।”

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