अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एंटीफा को आतंकी संगठन घोषित किया

News Saga Desk

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप ने देश में सक्रिय आंदोलनकारी समूह ‘एंटी-फासिस्ट’ (एंटीफा) को प्रमुख आतंकवादी संगठन घोषित किया है। उन्होंने यह घोषणा बुधवार को ट्रुथ सोशल के माध्यम से की। इससे पहले सोमवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने अवैध आव्रजन पर की गई कार्रवाई के विरोध में किए गए एंटीफा के आंदोलन की आलोचना की थी।

फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ने घोषणा में कहा, “एंटीफा भयानक है। यह विरोध प्रदर्शन नहीं हैं। यह अपराध है। वे पेशेवर आंदोलनकारी हैं। उन्हें जेल में डाल देना चाहिए। वे इस देश के साथ जो कर रहे हैं, वह वाकई विध्वंसकारी है।” ट्रंप ने 10 सितंबर को टर्निंग पॉइंट यूएसए के संस्थापक चार्ली किर्क के कथित हत्यारे टायलर रॉबिन्सन को “कट्टरपंथी” अति-वामपंथी सक्रियता से जोड़ा है।

अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध हत्यारे के हथियार के पास मिले गोलियों के खोल पर “अरे फासीवादी! पकड़ो!” और “बेला सियाओ बेला सियाओ सियाओ” लिखा हुआ था। यह अंश द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इतालवी प्रतिरोध के लोकप्रिय गीत के हैं।

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एंटीफा को फंड करने वालों को कड़े कानूनों के तहत कार्रवाई की धमकी दी है। ट्रंप ने लिखा, “मुझे अपने सभी अमेरिकी देशभक्तों को यह सूचित करते हुए खुशी हो रही है कि मैं एंटीफा को एक बीमार, खतरनाक, कट्टरपंथी वामपंथी आपदा मानता हूं और इसे एक प्रमुख आतंकवादी संगठन घोषित कर रहा हूं।”

इस सप्ताह की शुरुआत में सोमवार को व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने कहा था कि चार्ली किर्क ने उन्हें जो आखिरी संदेश भेजा था, उसमें हिंसा को बढ़ावा देने के आरोपी अनाम वामपंथी समूहों के खिलाफ कार्रवाई का आह्वान किया गया था। उल्लेखनीय है कि मई 2020 में भी डोनाल्ड ट्रंप ने एंटीफा को आतंकवादी समूह घोषित करने की बात कही थी।

सामरिक एवं अंतरराष्ट्रीय अध्ययन केंद्र के अनुसार, एंटीफा अति-वामपंथी उग्रवादियों का नेटवर्क है। यह फासीवादी, नस्लवादी और दक्षिणपंथी अतिवादियों का विरोध करता है। एंटीफा के सबसे आम प्रतीकों में से एक 1917 की रूसी क्रांति का लाल झंडा और 19वीं सदी के अराजकतावादियों का काला झंडा है। एंटीफा दक्षिणपंथी सभाओं और रैलियों को बाधित करने के लिए विरोध प्रदर्शन करता है। ऐसा कहा जाता है कि वे अपनी गतिविधियां सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड पीयर-टू-पीयर नेटवर्क और सिग्नल जैसी मैसेजिंग ऐप के जरिए संचालित करते हैं। इसके सदस्य अकसर काले कपड़े और मुखौटे पहनते हैं।


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