पश्चिम एशिया तनाव: खाड़ी में नेपाली श्रमिकों पर संकट, सुरक्षा बनाम रोजगार की चुनौती

News Saga Desk

काठमांडू: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर खाड़ी देशों में कार्यरत नेपाली श्रमिकों पर पड़ रहा है। हजारों श्रमिक इस समय अपनी सुरक्षा और आजीविका के बीच संतुलन बनाने की कठिन चुनौती का सामना कर रहे हैं। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे नागरिकों से अनावश्यक यात्रा से बचने और अत्यंत आवश्यक न होने पर वहीं ठहरने की अपील की है।

बुटवल के 27 वर्षीय विवेक महत इस दुविधा का जीता-जागता उदाहरण हैं। दोस्तों और परिजनों की सलाह के बावजूद वह कतर लौटने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि उनकी यात्रा दो बार रद्द हो चुकी है। महत ने कहा कि नौकरी खोने का डर उन्हें वापस जाने के लिए मजबूर कर रहा है। कतर के एक होटल में शेफ के रूप में कार्यरत महत करीब दो लाख रुपये मासिक कमाते हैं और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उन्हीं पर है।

ऐसी ही स्थिति कई अन्य नेपाली श्रमिकों की भी है, जो मानते हैं कि आर्थिक स्थिरता के लिए विदेश में काम करना ही उनके पास व्यावहारिक विकल्प है। नेपाल में सीमित आय और बचत के अवसरों के कारण यह निर्भरता और बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप, जहां कुछ श्रमिक विदेश लौटने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं खाड़ी देशों में पहले से कार्यरत कई लोग बढ़ती अनिश्चितता के बीच घर लौटने के विकल्प तलाश रहे हैं।

कतर में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत सुरबीर लामा लंबे समय से घर लौटना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक दबाव उन्हें रोक रहा है। उनकी पत्नी और बच्चे काठमांडू में रहते हैं। परिवार की जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई को देखते हुए उनके लिए यह फैसला आसान नहीं है।

सऊदी अरब में 12 वर्षों से कार्यरत विशाल गैरे ने भी इसी तरह की चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि स्थिति ऐसी है कि अगर विदेश जाएं तो सुरक्षा का खतरा है और अगर न जाएं तो परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो जाता है।

सरकार ने सुरक्षा कारणों से पहले कई पश्चिम एशियाई देशों के लिए श्रम स्वीकृति (लेबर अप्रूवल) पर रोक लगा दी थी। हालांकि, श्रमिकों के दबाव और उनकी चिंताओं को देखते हुए कुछ देशों के लिए आंशिक रूप से स्वीकृति फिर से शुरू कर दी गई है, ताकि अवकाश पर नेपाल आए श्रमिक अपने कार्यस्थलों पर लौट सकें।

अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 1,000 से 1,100 श्रमिक ऑनलाइन माध्यम से श्रम स्वीकृति के लिए आवेदन कर रहे हैं। विदेश रोजगार विभाग के मुताबिक, सऊदी अरब, यूएई, कतर, ओमान, यमन, जॉर्डन और तुर्की के लिए स्वीकृति बहाल की गई है, जबकि ईरान, इज़राइल, बहरीन, कुवैत, इराक और लेबनान के लिए यह अभी भी निलंबित है।

नेपाल वैदेशिक रोजगार व्यवसायी संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुजीत श्रेष्ठ ने कहा कि इस तरह के संकट में श्रमिकों की सुरक्षा और उनके रोजगार के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने सरकार से दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ठोस कदम उठाने की अपील की।

वहीं श्रम, रोजगार तथा सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कुछ देशों के लिए स्वीकृति बहाल करने का निर्णय उन श्रमिकों की स्थिति को ध्यान में रखकर लिया गया है, जो समय पर काम पर न लौटने की स्थिति में अपनी नौकरी गंवा सकते हैं।

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