News Saga Desk
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एमजेड विशटाउन के मालिक और बिल्डर अभय कुमार को बड़ी राहत दी है। हाई कोर्ट ने हैबियस कॉर्पस याचिका मंजूर करते हुए अभय कुमार को अवैध हिरासत से तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद 6 फरवरी की देर रात उन्हें रिहा कर दिया गया।
गिरफ्तारी में सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन नहीं
डबल बेंच में जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय ने सुनवाई के दौरान कहा कि नोएडा पुलिस ने गिरफ्तारी के समय सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया। कोर्ट ने माना कि गिरफ्तारी मेमो के क्लॉज-13 समेत कई जरूरी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया, जिससे गिरफ्तारी अवैध ठहरती है।
कोर्ट ने तुरंत रिहाई के निर्देश दिए
हाई कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता अभय कुमार को तुरंत रिहा किया जाए। कोर्ट ने अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता (AGA) को आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा और सर्टिफाइड कॉपी का इंतजार न करने का भी निर्देश दिया।
पहले ही जमानत पा चुके हैं दो आरोपी
इस मामले में सीजेएम कोर्ट पहले ही लोटस ग्रीन बिल्डर कंपनी के कर्मचारी रवि बंसल और सचिन करनवाल को जमानत दे चुकी है। हालांकि कोर्ट ने शर्त रखी है कि दोनों आरोपी बिना अनुमति देश नहीं छोड़ सकेंगे।
कैसे हुई थी युवराज मेहता की मौत
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, 16 जनवरी की देर रात सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता गुरुग्राम स्थित अपने कार्यालय से घर लौट रहे थे। घने कोहरे के कारण उनकी कार सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन साइट के गड्ढे में गिर गई। पानी का स्तर अधिक होने से कार पलट गई और तैरने लगी। युवराज किसी तरह बाहर निकले और अपने पिता को फोन कर हादसे की जानकारी दी। बावजूद इसके, रात करीब 1:45 बजे उनकी कार पूरी तरह पानी में डूब गई और युवराज की मौके पर ही मौत हो गई।
पिता की शिकायत पर दर्ज हुआ था केस
युवराज के पिता राजकुमार मेहता की तहरीर पर नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने एमजेड विशटाउन और लोटस ग्रीन बिल्डर कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसके बाद बिल्डर अभय कुमार समेत अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी। इस मामले ने काफी राजनीतिक और प्रशासनिक तूल भी पकड़ा था।
मामला अब भी जांच के दायरे में
हालांकि हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी प्रक्रिया को अवैध मानते हुए अभय कुमार को रिहा करने का आदेश दिया है, लेकिन युवराज मेहता की मौत से जुड़े मामले की जांच अब भी जारी है। प्रशासन और बिल्डर की जिम्मेदारी को लेकर सवाल बने हुए हैं।
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