News saga Desk
पलामू: प्रकृति पर्व सरहुल के पावन अवसर पर झारखंड के पलामू जिले में एक अनूठी पहल देखने को मिली। पलामू टाइगर रिजर्व के उत्तरी क्षेत्र स्थित छिपादोहर के लात गांव में ‘बाघ देवता’ की स्थापना की गई। इस अवसर पर 15 से अधिक गांवों के सैकड़ों ग्रामीण एकत्र हुए और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की।
आस्था और संरक्षण का संगम
सरहुल पर्व प्रकृति और पर्यावरण से जुड़ा हुआ है। इसी कड़ी में बाघ को प्रकृति का रक्षक मानते हुए ‘बाघ देवता’ के रूप में स्थापित किया गया। ग्रामीणों का मानना है कि इससे जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
डिप्टी डायरेक्टर ने दी जानकारी
पलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेशकांत जेना ने बताया कि बाघ देवता जंगल में आस्था के प्रतीक के रूप में उभरेंगे और लोगों में वन्यजीव संरक्षण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करेंगे।
बाघों के मूवमेंट के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र
जिस क्षेत्र में बाघ देवता की स्थापना की गई है, वह इलाका बाघों के मूवमेंट के लिए पहले से ही चर्चित रहा है। यहां वन विभाग द्वारा लगातार संरक्षण अभियान चलाए जा रहे हैं, साथ ही स्थानीय संस्कृति को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
ग्रामीणों की पहल, ‘परब भागीदारी’ अभियान का असर
कुछ दिनों पहले ग्रामीणों ने आपसी सहमति से बाघ देवता की स्थापना का निर्णय लिया था। यह पहल ‘परब भागीदारी’ अभियान के तहत शुरू की गई, जिसका उद्देश्य स्थानीय लोगों को प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण से जोड़ना है।
देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में शामिल
पलामू टाइगर रिजर्व करीब 1149 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में शामिल है। यहां बाघ संरक्षण की दिशा में लंबे समय से कार्य किया जा रहा है।
प्रकृति रक्षा का संदेश
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को बताया गया कि बाघ जंगल के संतुलन और प्रकृति की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ‘बाघ देवता’ की स्थापना को इसी संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में संरक्षण के प्रयासों को और मजबूती देगा।
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