News Saga Desk
रांची: झारखंड में दामोदर वैली कॉरपोरेशन यानि (DVC) क्षेत्र के लिए नया बिजली टैरिफ एक अप्रैल से लागू हो गया है। इस नए आदेश में पिछले वर्षों के बकाये का समायोजन, वर्तमान दरों की समीक्षा और भविष्य की योजनाओं को शामिल किया गया है। नई दरों का सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा, खासकर व्यापार और उद्योग क्षेत्र पर।
घरेलू उपभोक्ताओं को हल्की राहत
बता दें की, नई दरों के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को मामूली राहत दी गई है। पहले जहां बिजली 4.30 रुपये प्रति यूनिट थी, अब इसे घटाकर 4.25 रुपये प्रति यूनिट कर दिया गया है। हालांकि यह राहत सीमित मानी जा रही है।
व्यवसायिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी
व्यवसायिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी की गई है। इस श्रेणी में दर 4.30 रुपये से बढ़ाकर 4.80 रुपये प्रति यूनिट कर दी गई है। यानी प्रति यूनिट 50 पैसे का अतिरिक्त भार पड़ेगा, जिससे कारोबार की लागत बढ़ने की संभावना है।
उद्योगों पर सबसे ज्यादा असर
नई दरों का सबसे अधिक प्रभाव औद्योगिक उपभोक्ताओं पर पड़ा है।
11 केवी श्रेणी- 4.20 रुपये से बढ़कर 6.00 रुपये प्रति यूनिट
33 केवी श्रेणी- 5.90 रुपये प्रति यूनिट
132 केवी श्रेणी- 5.85 रुपये प्रति यूनिट
इस बढ़ोतरी से उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर आगे उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
कृषि और सिंचाई के लिए दरें स्थिर
कृषि और सिंचाई श्रेणी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यहां बिजली दर 5.30 रुपये प्रति यूनिट पहले की तरह ही बनी रहेगी, जिससे किसानों को राहत मिली है।
अतिरिक्त सरचार्ज का प्रावधान
कृषि श्रेणी को छोड़कर अन्य सभी उपभोक्ताओं पर 0.35 रुपये प्रति यूनिट का अतिरिक्त सरचार्ज लगाया गया है। यह पुराने बकाये के समायोजन के लिए लागू किया गया है, जिससे कुल बिजली बिल में बढ़ोतरी होगी।
समय पर भुगतान और प्रीपेड पर छूट
उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ रियायतें भी दी गई हैं। बिल जारी होने के पांच दिनों के भीतर भुगतान करने पर 2 प्रतिशत की छूट मिलेगी। वहीं, प्रीपेड मीटर अपनाने वाले उपभोक्ताओं को ऊर्जा शुल्क पर अतिरिक्त 3 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
ग्रीन एनर्जी और सोलर को बढ़ावा
नई टैरिफ व्यवस्था में ग्रीन एनर्जी को भी बढ़ावा दिया गया है। इसके तहत 0.45 रुपये प्रति यूनिट का ग्रीन टैरिफ लागू किया गया है। इसके अलावा रूफटॉप सोलर के लिए भी नई दरें तय की गई हैं—ग्रॉस मीटरिंग पर 4.16 रुपये और नेट मीटरिंग पर 3.80 रुपये प्रति यूनिट।
यह नई व्यवस्था उपभोक्ताओं के व्यवहार में बदलाव लाने और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
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