RBI का नया रूल ₹10,000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे का होल्ड

News Saga Desk

RBI ₹10,000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे का होल्ड लागू करने पर विचार कर रहा है, ताकि बढ़ते डिजिटल फ्रॉड को रोका जा सके। यह कदम यूजर्स को ट्रांजैक्शन कैंसल करने का समय देगा, लेकिन इससे इंस्टेंट पेमेंट की स्पीड पर असर पड़ सकता है।

डिजिटल पेमेंट के दौर में RBI (Reserve Bank of India) लगातार ट्रांजैक्शन सेफ्टी को बढ़ाने पर काम कर रहा है। यही वजह है कि अब एक नया बड़ा बदलाव सामने आ सकता है, जो आपकी डेली की UPI ट्रांजैक्शन को प्रभावित कर सकता है। जी हां, क्योंकि RBI एक ऐसे नियम पर विचार कर रहा है, जिसके तहत ₹10,000 से ज्यादा के UPI या अकाउंट-टू-अकाउंट ट्रांसफर पर आपको लगभग 1 घंटे तक इंतजार करना पड़ सकता है। इसका मतलब यह है कि पैसा तुरंत ट्रांसफर होने के बजाय होल्ड पर रहेगा, ताकि आप चाहें तो इस दौरान ट्रांजैक्शन को कैंसल भी कर सकें। आइए इस फीचर्स की खासियत जानते हैं।

इसकी वजह क्या है:
इस कदम के पीछे सबसे बड़ी वजह बढ़ता डिजिटल फ्रॉड है। आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में जहां करीब ₹551 करोड़ के फ्रॉड केस सामने आए थे, वहीं 2025 तक यह बढ़कर ₹22,000 करोड़ से ज्यादा हो गया है। खास बात यह है कि ₹10,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन कुल फ्रॉड का लगभग 98% वैल्यू कवर करते हैं। ऐसे में यह नया नियम सीधे बड़े-बड़े फ्रॉड पर लगाम लगाएगा।

ऑथराइज्ड पुश पेमेंट से बचें:
RBI (Reserve Bank of India) का मानना है कि आजकल ज्यादातर फ्रॉड टेक्निकल हैक से नहीं, बल्कि लोगों को डराकर या जल्दबाजी में फैसला करवाकर किए जाते हैं। इस तरह के फ्रॉड को ऑथराइज्ड पुश पेमेंट (Authorised Push Payment- APP) कहा जाता है, जिसमें यूजर खुद ही पैसा ट्रांसफर कर देता है। ऐसे में 1 घंटे का गैप फ्रॉडस्टर के दबाव को कम कर सकेगा। साथ ही यूजर्स के पास सोचने और समझने का समय बढ़ जाएगा, जिससे फ्रॉड को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कुछ अन्य उपायों पर भी विचार:
इसके अलावा RBI (Reserve Bank of India) कुछ और उपायों पर भी विचार कर रहा है, जैसे 70 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए ट्रस्टेड पर्सन की अनुमति, एक ‘किल स्विच’ जिससे तुरंत डिजिटल पेमेंट बंद किया जा सके। इसके अलावा रिजर्व बैंक बड़ी रकम पर अतिरिक्त वेरिफिकेशन का नियम लाने पर भी विचार कर रहा है।

प्रभावित हो सकता है यूजर एक्सपीरियंस:
हालांकि, इस प्रस्ताव के साथ एक चुनौती भी है। UPI की सबसे बड़ी ताकत उसकी इंस्टैंट स्पीड है और अगर इसमें देरी होती है, तो यूजर एक्सपीरियंस प्रभावित हो सकता है। इसलिए रिजर्व बैंक को सेफ्टी और फीचर्स के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करना होगा। अगर यह नियम लागू होता है, तो हो सकता है कि आपको थोड़ी देर इंतजार करना पड़े, लेकिन इसके बदले आपका पैसा ज्यादा सुरक्षित रहेगा।

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