Ayodhya Ram Mandir: CEO पद के लिए 52 उम्मीदवारों का इंटरव्यू

NEWS SAGA DESK

Ayodhya Ram Mandir में CEO नियुक्ति की प्रक्रिया तेज हो गई है। 5200 आवेदनों में से 52 उम्मीदवार इंटरव्यू के लिए चुने गए हैं। 11-12 अगस्त को साक्षात्कार होगा।

Ayodhya Ram Mandir के संचालन और प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज हो गई है। CEO पद के लिए करीब 5200 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनकी स्क्रीनिंग पूरी कर ली गई है। इनमें से 52 उम्मीदवारों को अब इंटरव्यू के लिए चुना गया है। चयनित उम्मीदवारों का साक्षात्कार 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में आयोजित किया जाएगा। इंटरव्यू पूरा होने के बाद चयन समिति तीन नामों का पैनल तैयार कर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपेगी।

Ayodhya Ram Mandir

CEO की नियुक्ति को राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ट्रस्ट की ओर से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद पैनल में शामिल किसी एक व्यक्ति को इस पद की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

11 और 12 अगस्त को होगा उम्मीदवारों का इंटरव्यू

Ayodhya Ram Mandir के CEO पद के लिए चुने गए 52 उम्मीदवारों का साक्षात्कार मंदिर परिसर स्थित पीएफसी में होगा। इस चयन प्रक्रिया की जिम्मेदारी सेवानिवृत्त जस्टिस प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय चयन समिति को दी गई है।

समिति उम्मीदवारों के इंटरव्यू के बाद उनके अनुभव, योग्यता और पद के लिए उपयुक्तता के आधार पर तीन नामों का चयन करेगी। इन तीन नामों का पैनल राम मंदिर ट्रस्ट के सामने रखा जाएगा। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में इस पैनल पर चर्चा हो सकती है। ट्रस्ट की मंजूरी के बाद अंतिम नाम की घोषणा की जाएगी।

ट्रस्ट के वरिष्ठ पदों पर भी हो सकता है फैसला

CEO नियुक्ति के अलावा ट्रस्ट की आगामी बैठक में अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर भी चर्चा होने की संभावना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पूर्णकालिक महासचिव और प्रवक्ता-सचिव की नियुक्ति पर भी विचार किया जा सकता है।

राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि से इस संबंध में संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं हो सकी। वहीं निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्र ने इस मामले में ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन से जानकारी लेने की बात कही। अंतरिम महासचिव ने CEO चयन की प्रक्रिया और 11-12 अगस्त को होने वाले इंटरव्यू की जानकारी की पुष्टि की है।

CEO की नियुक्ति क्यों है महत्वपूर्ण?

राम मंदिर के निर्माण के साथ-साथ यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या, मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं और प्रशासनिक गतिविधियों का दायरा भी बढ़ रहा है। ऐसे में एक पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति से संचालन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।

CEO के स्तर पर प्रशासनिक कामकाज के समन्वय, विभिन्न विभागों के बीच तालमेल और मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं की निगरानी जैसी जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण हो सकती हैं। हालांकि, नियुक्ति के बाद पद की विस्तृत जिम्मेदारियां ट्रस्ट की ओर से स्पष्ट की जाएंगी।

2020-21 से पुराने रिकॉर्ड की भी जांच

इधर Ayodhya Ram Mandir से जुड़े चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की जांच भी जारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर आईजी किरन एस की अगुवाई में गठित एसआईटी अब ट्रस्ट के गठन के शुरुआती दौर यानी 2020-21 से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।

पहले जांच का दायरा 2024-25 और 2025-26 के वित्तीय वर्षों के रिकॉर्ड तक बताया गया था। अब जांच टीम इससे पुराने रिकॉर्ड को भी अपने दायरे में लेकर पड़ताल कर रही है। पुराने कर्मचारियों को बुलाकर उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं और अलग-अलग बिंदुओं पर पूछताछ भी की जा रही है।

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बैंक खातों और अभिलेखों की जांच जारी

एसआईटी 2020-21 से 2023-24 तक के विभिन्न अभिलेखों की जांच कर रही है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के चालू खाते, बचत खाते और सावधि जमा से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में हैं।

जांच के तहत बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम भी अयोध्या पहुंचकर रिकॉर्ड की पड़ताल कर चुकी है। जांच की प्रगति रिपोर्ट एसआईटी को नियमित रूप से भेजी जा रही है। आईजी किरन एस के साथ डीआईजी सोमेन वर्मा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर और बाराबंकी के एडीशनल एसपी जांच की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं। अब सभी की नजरें 11 और 12 अगस्त को होने वाले CEO पद के इंटरव्यू पर हैं। 52 उम्मीदवारों में से चयन समिति तीन नामों का पैनल तैयार करेगी। इसके बाद प्रस्तावित 2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक में इन नामों पर विचार किया जाएगा।

ट्रस्ट की मंजूरी के बाद Ayodhya Ram Mandir को उसका पहला CEO मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। साथ ही वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर होने वाले संभावित फैसलों से मंदिर की प्रबंधन व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर, पुराने वित्तीय रिकॉर्ड की जांच आगे बढ़ने से चढ़ावे से जुड़े मामले में भी आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

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