NEWS SAGA DESK
बोकारो : भारत सरकार की दो प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) के लिए आने वाला एक वर्ष बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले तीन वर्षों के वित्तीय प्रदर्शन की समीक्षा के बाद केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय और लोक उद्यम विभाग (डीपीई) ने दोनों कंपनियों को चेतावनी नोटिस जारी किया है। सूत्रों के अनुसार, कंपनियों को अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए एक वर्ष का समय दिया गया है। इस दौरान उनके प्रदर्शन की लगातार निगरानी की जाएगी। यदि निर्धारित मानकों के अनुरूप सुधार नहीं हुआ तो दोनों कंपनियों का महारत्न दर्जा वापस लिया जा सकता है और उन्हें नवरत्न श्रेणी में रखा जा सकता है।
महारत्न दर्जा बनाए रखने के लिए क्या हैं नियम
सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को महारत्न का दर्जा बनाए रखने के लिए लगातार तीन वर्षों में औसतन कम से कम 5,000 करोड़ रुपये का वार्षिक शुद्ध लाभ अर्जित करना आवश्यक है। बताया जा रहा है कि सेल इस वित्तीय मानक को पूरा करने में सफल नहीं रही है। इसी कारण कंपनी को चेतावनी नोटिस जारी किया गया है। सरकार चाहती है कि कंपनी अपनी लाभप्रदता बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए और तय मानकों तक पहुंचे।
भेल के प्रदर्शन पर भी उठे सवाल
भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन संचालित भेल को भी कमजोर वित्तीय प्रदर्शन के कारण नोटिस मिला है। लोक उद्यम विभाग ने कंपनी प्रबंधन को परिचालन दक्षता बढ़ाने, लागत कम करने और लाभप्रदता में सुधार के लिए ठोस रणनीति तैयार करने का निर्देश दिया है। सरकार का मानना है कि देश के प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों को बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए अपने वित्तीय प्रदर्शन को लगातार मजबूत बनाए रखना चाहिए।
क्या है महारत्न का दर्जा
महारत्न दर्जा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को दिया जाने वाला सर्वोच्च दर्जा माना जाता है। इस दर्जे के साथ कंपनियों को निवेश, विस्तार और कारोबारी निर्णय लेने में अधिक स्वायत्तता मिलती है। इससे कंपनियां कई महत्वपूर्ण फैसले सरकार की पूर्व अनुमति के बिना भी ले सकती हैं। यही वजह है कि महारत्न का दर्जा केवल प्रतिष्ठा का विषय नहीं, बल्कि कारोबार और निवेश के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
सेल और भेल को कब मिला था महारत्न का दर्जा
सेल को मई 2010 में नवरत्न से पदोन्नत कर महारत्न का दर्जा दिया गया था। वहीं भेल को फरवरी 2013 में यह सम्मान मिला था। दोनों कंपनियां लंबे समय से देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं।
अब केंद्र सरकार की चेतावनी के बाद दोनों कंपनियों के सामने अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने और महारत्न का दर्जा बचाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। सूत्रों के मुताबिक नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद दोनों कंपनियों के प्रदर्शन की दोबारा समीक्षा की जाएगी। यदि वित्तीय मानकों में अपेक्षित सुधार दिखाई देता है तो उनका महारत्न दर्जा बरकरार रहेगा, लेकिन सुधार नहीं होने की स्थिति में उन्हें नवरत्न श्रेणी में लाया जा सकता है।
No Comment! Be the first one.