NEWS SAGA DESK
पश्चिम बर्दवान :- राज्य के शहरी विकास एवं नगर प्रशासन मंत्री अग्निमित्रा पाल ने शुक्रवार को दुर्गापुर स्थित केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएमईआरआई) का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की समस्या के समाधान के लिए सीएमईआरआई की आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने केंद्र की विकसित तकनीकों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।
मंत्री ने बताया कि सीएमईआरआई की तकनीक के माध्यम से प्लास्टिक कचरे से ईंधन, जैविक कचरे से खाद, सूखे पत्तों से वैकल्पिक ईंधन तथा निर्माण एवं ध्वस्तीकरण के मलबे से कम लागत वाली ईंटें तैयार की जा सकती हैं। इन तकनीकों को राज्य के विभिन्न नगर निकायों में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बनाई गई है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराएगी, जबकि सीएमईआरआई तकनीकी सहयोग और विशेषज्ञता प्रदान करेगा। इस पहल के तहत पुराने कचरे के ढेरों के प्रसंस्करण केंद्र विकसित किए जाएंगे, जहां प्लास्टिक, धातु, जैविक और निर्माण संबंधी अपशिष्ट को अलग कर उनका पुनर्चक्रण किया जाएगा। इससे पर्यावरण प्रदूषण कम होने के साथ-साथ राजस्व सृजन की भी संभावना बढ़ेगी।
अग्निमित्रा पाल ने बताया कि नगर विकास विभाग की ओर से सीएमईआरआई को पहले ही पत्र भेजा जा चुका है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और पुराने कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए इस तकनीक के उपयोग की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
इस अवसर पर दुर्गापुर पश्चिम के विधायक लखन घुरुई तथा दुर्गापुर पूर्व के विधायक चंद्रशेखर बनर्जी भी उपस्थित रहे।
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