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Bharat Bodh Lecture में रामाशीष सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की समस्याओं का स्थायी समाधान है। सीवान में आयोजित कार्यक्रम में संस्कृति पर गर्व करने का आह्वान।
सीवान में आयोजित व्याख्यानमाला में वक्ताओं ने भारतीय संस्कृति, सभ्यता और जीवन-दर्शन की वैश्विक प्रासंगिकता पर रखा जोर।
सीवान में आयोजित Bharat Bodh Lecture कार्यक्रम के दौरान भारतीय संस्कृति, सभ्यता और जीवन-दर्शन की वैश्विक प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की गई। दयानंद आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज परिसर में चेतना (प्रज्ञा प्रवाह) की जिला इकाई द्वारा आयोजित इस व्याख्यानमाला में वक्ताओं ने भारतीय संस्कृति को विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान बताते हुए लोगों से अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का विषय “भारत बोध और सांस्कृतिक अवधारणा” रखा गया था। इसमें विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। मुख्य वक्ता प्रज्ञा प्रवाह की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य एवं प्रचारक रामाशीष सिंह रहे, जिन्होंने भारतीय संस्कृति की विशेषताओं और उसकी वैश्विक उपयोगिता पर अपने विचार व्यक्त किए।
Bharat Bodh Lecture में भारतीय संस्कृति की विशेषताओं पर चर्चा
अपने संबोधन में रामाशीष सिंह ने कहा कि वास्तविक अर्थों में धर्म की अवधारणा भारत में विकसित हुई है। उन्होंने कहा कि अन्य देशों में प्रायः मजहब या रिलिजन की अवधारणा देखने को मिलती है, जबकि भारत में धर्म का अर्थ व्यापक और जीवन को दिशा देने वाला है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति मानव, प्रकृति और संपूर्ण सृष्टि के बीच संतुलन और समन्वय स्थापित करने की प्रेरणा देती है। यही कारण है कि भारतीय जीवन-दर्शन केवल मनुष्य केंद्रित नहीं बल्कि संपूर्ण सृष्टि के कल्याण की बात करता है। Bharat Bodh Lecture के दौरान उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, उनका समाधान भारतीय विचार परंपरा में मौजूद है।

भारतीय संस्कृति और प्रकृति का गहरा संबंध
रामाशीष सिंह ने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में धरती को मां कहकर संबोधित करने की परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है। भारतीय संस्कृति प्रकृति को केवल संसाधन नहीं मानती, बल्कि उसके साथ आत्मीय संबंध स्थापित करती है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की अवधारणाएं आज पूरी दुनिया में चर्चा का विषय हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति सदियों से प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण का संदेश देती रही है। Bharat Bodh Lecture में यह भी बताया गया कि प्रकृति और मानव के बीच संतुलन बनाए रखना भारतीय जीवन-दर्शन की मूल भावना है।
विश्व का मार्गदर्शन करने में सक्षम है भारत
कार्यक्रम में विषय प्रस्तुति करते हुए डॉ. अशोक प्रियंबद ने कहा कि भारत विश्व के सबसे प्राचीन जीवंत राष्ट्रों में से एक है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति और सभ्यता ने हजारों वर्षों की यात्रा तय की है और आज भी इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि दुनिया वर्तमान में पर्यावरणीय संकट, सामाजिक असमानता और नैतिक चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे समय में भारतीय संस्कृति का समन्वयवादी दृष्टिकोण विश्व को नई दिशा दे सकता है। Bharat Bodh Lecture के दौरान उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन पद्धति संघर्ष नहीं बल्कि सहयोग और संतुलन पर आधारित है।
पर्यावरणीय और सामाजिक संकटों का समाधान
वक्ताओं ने कहा कि आज विश्व जिन समस्याओं का सामना कर रहा है, उनमें जलवायु परिवर्तन, सामाजिक तनाव और मानवीय मूल्यों का ह्रास प्रमुख हैं। भारतीय संस्कृति इन सभी चुनौतियों का स्थायी समाधान प्रस्तुत करती है।
भारतीय परंपरा “वसुधैव कुटुंबकम्” के सिद्धांत को मानती है, जो पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की प्रेरणा देती है। यही विचार वैश्विक शांति और सद्भाव का आधार बन सकता है। Bharat Bodh Lecture में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भारतीय संस्कृति केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक है।
अध्यक्षीय संबोधन में संस्कृति पर गर्व करने का आह्वान
कार्यक्रम की अध्यक्षता दयानंद आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के संरक्षक एवं पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रजापति त्रिपाठी ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वश्रेष्ठ संस्कृतियों में से एक है, जो मानवता, समरसता और विश्व बंधुत्व का संदेश देती है।
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उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भारतीय संस्कृति, योग और भारतीय जीवनशैली की ओर आकर्षित हो रही है। ऐसे में प्रत्येक भारतीय का दायित्व है कि वह अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझे और उस पर गर्व करे। Bharat Bodh Lecture का मुख्य संदेश भी यही रहा कि भारतीय संस्कृति के मूल्यों को अपनाकर समाज और विश्व को बेहतर दिशा दी जा सकती है।
कार्यक्रम का महत्व और जनसंदेश
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने भारतीय संस्कृति और उसके मूल सिद्धांतों पर गहन चर्चा की। वक्ताओं ने युवाओं से भारतीय इतिहास, संस्कृति और परंपराओं के अध्ययन पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
आयोजकों का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने और युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। Bharat Bodh Lecture ने भारतीय संस्कृति के वैश्विक महत्व और उसकी प्रासंगिकता को एक बार फिर रेखांकित किया।
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