Jharkhand Voter List Update: जन संगठनों ने 47 लाख Unmapped Voters और ASD सूची सार्वजनिक करने की मांग की। SIR प्रक्रिया के बीच CEO को ज्ञापन सौंपा गया।
Jharkhand Voter List Update के बीच झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) प्रक्रिया को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। राज्य के कई जन संगठनों ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) से 47 लाख Unmapped Voters और ASD (Absent, Shifted, Dead) मतदाताओं की सूची सार्वजनिक करने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि यदि यह सूची समय रहते सार्वजनिक कर दी जाती है, तो प्रभावित मतदाता अपनी मैपिंग, दस्तावेजों के सत्यापन और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को निर्धारित समय के भीतर पूरा कर सकेंगे। Jharkhand Voter List Update से जुड़ी यह मांग चुनावी पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
गुरुवार को झारखंड जनाधिकार महासभा, यूनाइटेड मिली फोरम, साझा कदम, एपीसीआर, भारत जोड़ो अभियान और लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान समेत कई संगठनों ने संयुक्त रूप से मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को ईमेल और व्हाट्सएप के माध्यम से ज्ञापन भेजा। इसमें मतदाता सूची से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव और मांगें रखी गई हैं।

47 लाख Unmapped Voters को लेकर उठे सवाल
जन संगठनों ने अपने ज्ञापन में कहा कि हाल के दिनों में मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से यह जानकारी सामने आई कि झारखंड में लगभग 47 लाख मतदाताओं की मैपिंग अब तक नहीं हो सकी है। इसी बीच 30 जून से गणना प्रपत्र (Enumeration Form) भरने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है, जो निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार लगभग एक महीने तक चलेगी।
संगठनों का कहना है कि जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो पाएगी या जिनके रिकॉर्ड में किसी प्रकार की विसंगति मिलेगी, उन्हें बाद में नोटिस जारी कर अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा जाएगा। ऐसे में यदि Jharkhand Voter List Update के तहत Unmapped Voters की सूची पहले ही सार्वजनिक कर दी जाए, तो संबंधित लोग समय रहते आवश्यक दस्तावेज तैयार कर सकेंगे।
ASD सूची भी सार्वजनिक करने की मांग
ज्ञापन में केवल Unmapped Voters की सूची ही नहीं, बल्कि ASD (Absent, Shifted, Dead) मतदाताओं की सूची भी सार्वजनिक करने की मांग की गई है। जन संगठनों का कहना है कि यदि यह सूची वेबसाइट और बूथ स्तर पर उपलब्ध होगी, तो आम नागरिक भी उसका सत्यापन कर सकेंगे।
उनका मानना है कि सार्वजनिक सत्यापन से किसी भी प्रकार की त्रुटि, दोहराव या गलत प्रविष्टि को समय रहते सुधारा जा सकेगा। इससे मतदाता सूची अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी।
Background: क्या है SIR प्रक्रिया?
विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) निर्वाचन आयोग द्वारा समय-समय पर मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने के लिए चलाया जाने वाला अभियान है। इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन किया जाता है, नए मतदाताओं को जोड़ा जाता है तथा मृत, स्थानांतरित या अन्य कारणों से अयोग्य हो चुके नामों की पहचान की जाती है।
झारखंड में इस बार SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में Unmapped Voters सामने आने की जानकारी ने इस विषय को चर्चा का केंद्र बना दिया है। Jharkhand Voter List Update के तहत अब विभिन्न सामाजिक संगठनों ने प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है।
ग्राम सभा और वार्ड सभा से सत्यापन कराने की अपील
जन संगठनों ने निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन का हवाला देते हुए मांग की है कि ड्राफ्ट मतदाता सूची को ग्राम सभा और वार्ड सभा में पढ़कर सुनाया जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर त्रुटियों की पहचान और सुधार किया जा सके।
संगठनों ने यह भी कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में लागू PESA नियमावली के अनुसार ग्राम सभा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए Unmapped Voters और ASD सूची को ग्राम सभाओं के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए, जिससे स्थानीय स्तर पर वास्तविक स्थिति का सत्यापन हो सके।
Official Statement: जन संगठनों ने क्या कहा?
संयुक्त ज्ञापन में संगठनों ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम तकनीकी कारणों से सूची में दर्ज नहीं हो पाता या उसकी मैपिंग नहीं होती, तो उसका मतदान का अधिकार प्रभावित हो सकता है।
संगठनों ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से आग्रह किया कि 47 लाख Unmapped Voters की सूची तुरंत सार्वजनिक की जाए, ASD सूची को भी वेबसाइट और बूथ स्तर पर उपलब्ध कराया जाए तथा SIR प्रक्रिया की जानकारी व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाई जाए।
समाचार लिखे जाने तक निर्वाचन विभाग की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई थी।
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Public Information: मतदाता क्या करें?
विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को अपने नाम, पता और अन्य विवरण की नियमित जांच करते रहना चाहिए। यदि किसी मतदाता को अपने रिकॉर्ड में त्रुटि दिखाई देती है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवश्यक दस्तावेज जमा कर सुधार के लिए आवेदन कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते सूची का सत्यापन करने से अंतिम मतदाता सूची में त्रुटियों की संभावना कम हो जाती है। आगामी तीन महीनों तक चलने वाली SIR प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों पर नजर रखना भी सभी मतदाताओं के लिए आवश्यक होगा।
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