दिल्ली में झारखंड का ‘इन्वेस्टमेंट ब्लूप्रिंट’ तैयार, उद्योगों के जरिए लाखों रोजगार सृजन पर सरकार का बड़ा फोकस

नई दिल्ली में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 में झारखंड को देश का प्रमुख निवेश और औद्योगिक केंद्र बनाने पर मंथन हुआ। मंत्री संजय प्रसाद यादव ने उद्योग, निवेश, कौशल विकास और रोजगार सृजन को लेकर सरकार की रणनीति साझा की

NEWS SAGA DESK:

झारखंड को देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में शुक्रवार को नई दिल्ली के होटल ताज पैलेस में आयोजित दो दिवसीय नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 के दूसरे दिन उद्योग और निवेश को लेकर व्यापक चर्चा हुई। इंडस्ट्रियल प्रमोशन एंड इन्वेस्टमेंट विषय पर आयोजित इस सत्र में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, निवेशकों और विकास सहयोगियों ने राज्य में निवेश बढ़ाने और औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए अपने सुझाव साझा किए।

इस उच्चस्तरीय सत्र की अध्यक्षता झारखंड सरकार के उद्योग, श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के मंत्री संजय प्रसाद यादव ने की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने, आधुनिक बुनियादी ढांचा विकसित करने, कुशल मानव संसाधन तैयार करने और उद्योगों के लिए पारदर्शी एवं प्रभावी नीतियां लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

 नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026

बैठक के दौरान झारखंड में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, निजी निवेश को आकर्षित करने, औद्योगिक आधारभूत संरचना को मजबूत करने, क्षेत्र विशेष में निवेश की संभावनाओं को बढ़ाने तथा भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। इसके साथ ही सरकार और निजी क्षेत्र के बीच मजबूत साझेदारी, टिकाऊ औद्योगिकीकरण और राज्य के प्राकृतिक संसाधनों तथा रणनीतिक भौगोलिक स्थिति का बेहतर उपयोग करने पर भी जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने झारखंड को खनन, इस्पात, विनिर्माण, फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स और उभरते औद्योगिक क्षेत्रों में अपार संभावनाओं वाला राज्य बताया। उन्होंने कहा कि नीति में स्थिरता, नई तकनीकों का उपयोग, नवाचार और परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन से झारखंड देश के सबसे पसंदीदा निवेश स्थलों में शामिल हो सकता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य झारखंड में ही रोजगार और आजीविका के पर्याप्त अवसर पैदा करना है, ताकि युवाओं को रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन न करना पड़े।

उन्होंने कहा,
“माननीय मुख्यमंत्री की सोच है कि झारखंड में उद्योग और पर्यटन दोनों क्षेत्रों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाए। कई राज्यों ने पर्यटन और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, अब झारखंड भी अपनी अपार संभावनाओं का पूरा लाभ उठाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उद्योग और राज्य एक-दूसरे के पूरक हैं। सरकार और उद्योग जगत की मजबूत साझेदारी से ही निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और समावेशी आर्थिक विकास सुनिश्चित होगा।”

इस परिचर्चा का संचालन उद्योग, खान एवं भूविज्ञान विभाग के सचिव अरवा राजकमल ने किया। पैनल चर्चा में जिंदल ग्रुप के वाइस चेयरमैन वी. के. शर्मा, रुंगटा ग्रुप के चेयरमैन सिद्धार्थ रुंगटा, इन्वेस्ट इंडिया की प्रबंध निदेशक निवृत्ति राय, टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट सुंदर रमण तथा वरुण बेवरेजेज लिमिटेड की प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट अफेयर्स) देव्यानी खानखोजे ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, मंत्री संजय प्रसाद यादव, मंत्री सुदिव्य कुमार, मंत्री इरफान अंसारी तथा मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

बैठक का समापन इस साझा संकल्प के साथ हुआ कि सरकार और उद्योग जगत मिलकर झारखंड को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी औद्योगिक केंद्र बनाने की दिशा में काम करेंगे। इस मंथन से प्राप्त सुझाव राज्य की दीर्घकालिक औद्योगिक नीति और विकास रणनीति को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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