सिंहभूम मलेरिया संकट गहराया। 14 वर्षीय छात्रा की मौत के साथ मृतकों की संख्या 9 हुई, 83 नए मरीज मिले और 27 स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई की गई।
पूर्वी सिंहभूम मलेरिया का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। जिले में मलेरिया से एक और किशोरी की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। गालूडीह थाना क्षेत्र के हेंदलजुड़ी पंचायत स्थित केंदडांगा टोला की रहने वाली 14 वर्षीय किरण हांसदा की मौत ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता और बढ़ा दी है। इसी बीच जिले में 83 नए मलेरिया संक्रमित मरीजों की पुष्टि हुई है। बढ़ते संक्रमण के बीच स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही सामने आने पर 27 डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।

14 वर्षीय छात्रा की मलेरिया से मौत
पूर्वी सिंहभूम मलेरिया से जान गंवाने वाली किरण हांसदा राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, काकड़ीशोल की आठवीं कक्षा की छात्रा थी। जानकारी के अनुसार वह कुछ समय से धालभूमगढ़ थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुर गांव में अपने रिश्तेदारों के यहां रह रही थी। रविवार को परिजन उसे वापस गांव लेकर आए थे।
सोमवार को तबीयत बिगड़ने पर पहले उसे घाटशिला स्थित एक निजी नर्सिंग होम ले जाया गया। वहां हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया। इलाज के दौरान सोमवार रात उसकी मौत हो गई। अस्पताल की रिपोर्ट में मौत का कारण मलेरिया सेप्सिस बताया गया है।
जिले में लगातार बढ़ रहे हैं मलेरिया के मामले
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पूर्वी सिंहभूम मलेरिया नियंत्रण के लिए जिलेभर में लगातार सर्विलांस, जांच, उपचार और मच्छर नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। मंगलवार को 11,362 लोगों की जांच की गई, जिनमें 83 लोग मलेरिया पॉजिटिव पाए गए।
29 जून से 14 जुलाई 2026 तक जिले में कुल 1,30,380 लोगों की जांच की गई, जिसमें 2,072 मरीज संक्रमित मिले हैं। यह आंकड़ा बताता है कि जिले में संक्रमण अभी भी तेजी से फैल रहा है और स्वास्थ्य विभाग के लिए यह बड़ी चुनौती बना हुआ है।
किन इलाकों में सबसे ज्यादा मरीज मिले?
मंगलवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार डुमरिया और पोटका प्रखंड सबसे अधिक प्रभावित रहे, जहां 22-22 नए मरीज मिले। इसके अलावा घाटशिला में 10, मुसाबनी में 9, धालभूमगढ़ में 7, सदर अस्पताल क्षेत्र में 7 और पटमदा में 6 नए संक्रमितों की पहचान हुई।
एमजीएम अस्पताल में फिलहाल आठ मलेरिया मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें से एक मरीज की हालत गंभीर बताई गई है, जिस पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी रखी जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर कार्रवाई
पूर्वी सिंहभूम मलेरिया के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य केंद्रों में कर्मचारियों की अनुपस्थिति भी सामने आई है। शिकायत मिलने पर सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल के निर्देश पर विभिन्न शहरी स्वास्थ्य केंद्रों का औचक निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान कई डॉक्टर, एएनएम, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, जीएनएम, होमगार्ड, एमपीडब्ल्यू और अन्य कर्मचारी ड्यूटी से अनुपस्थित मिले। इसके बाद कुल 27 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और एक दिन का वेतन रोकने का आदेश दिया गया।
इनमें 10 डॉक्टर, चार एएनएम, तीन लैब टेक्नीशियन, एक फार्मासिस्ट, एक जीएनएम, तीन सहायक कर्मचारी, दो एमपीडब्ल्यू, एक होमगार्ड और दो सुरक्षा गार्ड शामिल हैं। सभी से 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आगे की विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
पृष्ठभूमि
पूर्वी सिंहभूम जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में हर वर्ष मानसून के दौरान मलेरिया के मामले बढ़ जाते हैं। इस बार भी लगातार बारिश, जलभराव और मच्छरों की बढ़ती संख्या के कारण संक्रमण तेजी से फैला है। स्वास्थ्य विभाग विशेष जांच शिविर, दवा वितरण, फॉगिंग और जागरूकता अभियान चला रहा है, लेकिन संक्रमण की रफ्तार अब भी चिंता का विषय बनी हुई है।
संभावित प्रभाव
पूर्वी सिंहभूम मलेरिया के लगातार बढ़ते मामलों से ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है। यदि समय पर जांच और इलाज नहीं मिला तो गंभीर मरीजों की संख्या और बढ़ सकती है। वहीं स्वास्थ्य केंद्रों में कर्मचारियों की अनुपस्थिति जैसी घटनाएं जनस्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही हैं।
आधिकारिक बयान
सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने कहा कि मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों से निपटने के लिए सभी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्यूटी में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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जनता के लिए जरूरी सूचना
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि तेज बुखार, ठंड लगना, कमजोरी या अन्य मलेरिया जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। घर और आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी का उपयोग करें और स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे जांच एवं जागरूकता अभियान में सहयोग करें।
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