हॉकी झारखंड चुनाव से पहले विवाद गहरा गया है। 13 पूर्व खिलाड़ियों ने लीगल नोटिस भेजकर चुनाव रोकने की मांग की है और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
हॉकी झारखंड चुनाव को लेकर राज्य में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 19 जुलाई को प्रस्तावित चुनाव से पहले झारखंड के कई पूर्व अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय खिलाड़ियों ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए हॉकी इंडिया और खेल मंत्रालय के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है। ओलिंपियन मनोहर टोपनो, पूर्व भारतीय महिला हॉकी कप्तान सुमराय टेटे समेत 13 पूर्व खिलाड़ियों ने लीगल नोटिस भेजकर चुनाव को रोकने की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा प्रक्रिया राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम-2025 और खेल प्रशासन से जुड़े नियमों के अनुरूप नहीं है।

चुनाव प्रक्रिया पर उठे सवाल
हॉकी झारखंड चुनाव को लेकर भेजे गए लीगल नोटिस में पूर्व खिलाड़ियों ने दावा किया है कि राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम-2025 लागू होने के बाद राष्ट्रीय खेल महासंघों और उनसे संबद्ध इकाइयों के चुनाव 31 दिसंबर 2026 तक स्थगित रहने चाहिए। इसके बावजूद 19 जुलाई को चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसे उन्होंने नियमों के विपरीत बताया है।
पूर्व खिलाड़ियों का कहना है कि यदि अधिनियम के प्रावधान लागू हैं, तो चुनाव कराने से पहले सभी संबंधित प्रक्रियाओं और दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है।
खिलाड़ियों को प्रतिनिधित्व नहीं मिलने का आरोप
पूर्व खिलाड़ियों ने आरोप लगाया है कि हॉकी झारखंड चुनाव से जुड़े पूरे संगठनात्मक ढांचे में खिलाड़ियों की आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उनका कहना है कि वर्षों से संगठन के महत्वपूर्ण निर्णयों में पूर्व अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय खिलाड़ियों की भागीदारी सीमित रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि खिलाड़ियों के अनुभव और सुझावों की अनदेखी से खेल के विकास पर नकारात्मक असर पड़ा है। उनके अनुसार, चुनाव प्रक्रिया भी हॉकी इंडिया के संशोधित संविधान और खेल मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं दिखाई देती।
चुनाव रोकने की मांग और कानूनी चेतावनी
लीगल नोटिस में संबंधित अधिकारियों से चुनाव प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की गई है। पूर्व खिलाड़ियों ने स्पष्ट किया है कि यदि आपत्तियों के बावजूद 19 जुलाई को चुनाव कराया गया, तो संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा और अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
इस घटनाक्रम ने झारखंड की खेल राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
यौन उत्पीड़न के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग
इसी बीच पूर्व भारतीय महिला हॉकी कप्तान असुंता लकड़ा ने राष्ट्रीय महिला आयोग को पत्र भेजकर हॉकी इंडिया और उससे जुड़ी संस्थाओं में यौन उत्पीड़न की शिकायतों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से झारखंड की महिला खिलाड़ियों से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की अपील की है।
यह मामला चुनाव विवाद के साथ-साथ खेल संगठनों में पारदर्शिता और खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर भी नए सवाल खड़े कर रहा है।
हॉकी इंडिया महासचिव का पक्ष
दूसरी ओर हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और खेल मंत्री सुदिव्य कुमार को पत्र लिखकर स्वतंत्र जांच समिति गठित करने का अनुरोध किया है।
उन्होंने कहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने से तथ्यों की स्पष्टता सामने आएगी और किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति समाप्त होगी।
पृष्ठभूमि
पिछले कुछ समय से झारखंड में हॉकी प्रशासन को लेकर असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं। पूर्व खिलाड़ियों द्वारा संगठन में पारदर्शिता, खिलाड़ियों के प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक सुधारों की मांग लगातार उठाई जाती रही है। अब चुनाव से ठीक पहले लीगल नोटिस भेजे जाने के बाद यह विवाद और गहरा गया है।
खेल प्रशासन पर संभावित प्रभाव
यदि कानूनी विवाद आगे बढ़ता है, तो इसका असर हॉकी झारखंड चुनाव की प्रक्रिया और राज्य के खेल प्रशासन पर पड़ सकता है। चुनाव स्थगित होने या न्यायिक हस्तक्षेप की स्थिति में संगठन के प्रशासनिक निर्णयों और भविष्य की योजनाओं पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद का समाधान पारदर्शी प्रक्रिया और सभी पक्षों के बीच संवाद के माध्यम से होना राज्य की हॉकी के हित में होगा।
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आधिकारिक जानकारी
पूर्व खिलाड़ियों ने चुनाव प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए लीगल नोटिस जारी किया है और चुनाव रोकने की मांग की है। वहीं हॉकी इंडिया के महासचिव ने अपने खिलाफ लगे आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने की अपील की है। फिलहाल चुनाव कार्यक्रम में किसी आधिकारिक बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।
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