JPSC नियुक्ति घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, ECIR दर्ज

NEWS SAGA DESK

JPSC नियुक्ति घोटाले में ED ने ECIR दर्ज की है। TDPL के दोनों निदेशकों समेत आठ लोगों को नामजद किया गया है। JSSC के परीक्षा कार्य भी जांच के दायरे में हैं।

JPSC नियुक्ति घोटाले में ED ने ECIR दर्ज की है

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़ी कथित नियुक्ति और परीक्षा अनियमितता के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने JPSC नियुक्ति घोटाले में Enforcement Case Information Report यानी ECIR दर्ज की है। इसमें डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के दोनों निदेशकों समेत कुल आठ लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है।

TDPL को भी मामले में अभियुक्त बनाए जाने के बाद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से इस कंपनी को सौंपे गए परीक्षा संबंधी कार्य भी जांच के दायरे में आने की संभावना है। ED अब कंपनी के पुराने रिकॉर्ड, उसे दिए गए परीक्षा संबंधी काम और कथित अनियमितताओं से जुड़े पहलुओं की जांच कर सकती है।

आठ लोगों को बनाया गया नामजद अभियुक्त

ED की ओर से दर्ज ECIR में TDPL के निदेशक सत्यपाल सिंह और रामबीर सिंह के अलावा JPSC की उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, आयोग के कर्मचारी मनोज तिर्की और सोनू कुमार को नामजद किया गया है।

इसके अलावा TDPL के कर्मचारियों मोहम्मद उसमान और अवध तथा TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी को भी अभियुक्त बनाया गया है।

इस तरह ECIR में कंपनी और उससे जुड़े लोगों के साथ JPSC के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

नियमों के उल्लंघन का आरोप

ED की ECIR के अनुसार, JPSC ने कथित तौर पर नियमों का पालन किए बिना नॉमिनेशन के आधार पर TDPL को परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य सौंपे। एजेंसी ने यह भी आरोप दर्ज किया है कि कंपनी को काम देने से पहले उसके पूर्व रिकॉर्ड और गतिविधियों की पर्याप्त जांच नहीं की गई।

ED अब यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि TDPL को परीक्षा संबंधी कार्य किस प्रक्रिया के तहत दिया गया और इस दौरान किन अधिकारियों की भूमिका रही।

JSSC के पुराने कार्य भी जांच के दायरे में

ECIR में TDPL के पूर्व रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया गया है। एजेंसी के अनुसार, TDPL को पहले JSSC की ओर से परीक्षा से जुड़े कार्य दिए गए थे। हालांकि कथित गड़बड़ियों और अन्य कारणों के चलते JSSC ने कंपनी का वर्क ऑर्डर रद्द कर दिया था।

इसके साथ ही कंपनी को अगले तीन वर्षों के लिए प्रतिबंधित किए जाने का भी उल्लेख ECIR में किया गया है। TDPL को अब JPSC मामले में अभियुक्त बनाए जाने के बाद उसके पुराने परीक्षा कार्यों की भी जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

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ED के अनुसार, कंपनी ने उत्तर प्रदेश में भी कई परीक्षाओं का संचालन किया था। वहां भी परीक्षा संचालन में कथित अनियमितताओं से जुड़े गंभीर आरोप सामने आने की बात ECIR में दर्ज की गई है।

इसके बाद असीम किस्पोट्टा से परीक्षा नियंत्रक का काम लेकर श्वेता गुप्ता को सौंपे जाने का उल्लेख ECIR में किया गया है। एजेंसी ने इस घटनाक्रम को भी अपनी जांच का हिस्सा बनाया है।

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