रघुवर दास ने छात्रों की मांगों पर सरकार को दी चेतावनी

NEWS SAGA DESK

रघुवर दास ने रांची में आंदोलनरत छात्रों का समर्थन किया और सरकार से एक सप्ताह में मांगें पूरी करने की अपील की। मांगें पूरी न होने पर अनशन की चेतावनी दी।

रांची में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास पहुंचे। करीब 20 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों से मुलाकात के दौरान उन्होंने उनकी मांगों का समर्थन किया और राज्य सरकार से एक सप्ताह के भीतर समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि तय समय में छात्रों की मांगें पूरी नहीं हुईं तो वह स्वयं अनशन पर बैठेंगे।

JPSC-JSSC परीक्षाओं

छात्रों के आंदोलन के बीच पहुंचे रघुवर दास

आंदोलन स्थल पर छात्रों को संबोधित करते हुए रघुवर दास ने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र झारखंड के दूर-दराज के इलाकों से अपनी मांगों को लेकर रांची पहुंचे हैं। उनके अनुसार, इतने लंबे समय से आंदोलन के बावजूद सरकार की ओर से अपेक्षित समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने सरकार से छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेने और बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की अपील की।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों की मांगों को केवल राजनीतिक मुद्दे के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, यह युवाओं के भविष्य और भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय है।

JPSC-JSSC परीक्षाओं में अनियमितताओं का आरोप

रघुवर दास ने JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इन्हीं आरोपों के खिलाफ छात्र आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से निष्पक्ष और जिम्मेदारी के साथ काम करने की अपील की। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनरत छात्रों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रशासनिक प्रक्रिया में किसी भी तरह की छेड़छाड़ से बचना चाहिए। उनका कहना था कि अधिकारियों का करियर और जिम्मेदारी लंबे समय तक बनी रहती है, इसलिए उन्हें अपने दायित्व का निर्वहन निष्पक्ष तरीके से करना चाहिए।

JPSC-JSSC परीक्षाओं

एक सप्ताह का अल्टीमेटम, अनशन की चेतावनी

आंदोलन के दौरान रघुवर दास ने सरकार को एक सप्ताह का समय देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस अवधि में छात्रों की मांगों पर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो वह भी छात्रों के साथ अनशन पर बैठेंगे।

उनके इस बयान से आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक समर्थन मिलने की चर्चा तेज हो सकती है। हालांकि, छात्रों की मांगों पर सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाता है, यह इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण रहेगा।

सरकार से हठधर्मिता छोड़ने की अपील

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्र झारखंड का भविष्य हैं और सरकार को उनकी मांगों को प्रतिष्ठा का विषय नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने सरकार से भटकाव छोड़कर छात्रों की जायज मांगों पर विचार करने की अपील की।

उन्होंने JSSC CGL सहित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में कई परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी परिस्थितियों से युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

उत्पाद सिपाही भर्ती में मौतों का भी जिक्र

रघुवर दास ने उत्पाद सिपाही भर्ती प्रक्रिया के दौरान जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने मृत अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग की। उनका कहना था कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों में सरकार को अभ्यर्थियों की सुरक्षा और उनके परिवारों की चिंताओं को भी गंभीरता से देखना चाहिए।

यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में बड़ी संख्या में युवा भाग लेते हैं और उनके लिए पारदर्शिता, निष्पक्षता तथा सुरक्षित व्यवस्था बेहद अहम होती है।


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छात्रों को संबोधित करते हुए रघुवर दास ने कहा कि झारखंड के हर परिवार की भावनाएं इस आंदोलन से जुड़ी हैं। उन्होंने आम लोगों से छात्रों की मदद करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि छात्र आंदोलन से ही उनका राजनीतिक जीवन शुरू हुआ था, लेकिन इस मंच से वह राजनीतिक बात नहीं करेंगे। अंत में उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह एक दास की तरह उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। उनके बयान के बाद छात्रों के आंदोलन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा और बढ़ने की संभावना है।

अब सबकी नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है। छात्रों की मांगों, JPSC-JSSC परीक्षाओं से जुड़े आरोपों और भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर सरकार का आधिकारिक रुख महत्वपूर्ण होगा। यदि एक सप्ताह में समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं होती है, तो रघुवर दास द्वारा अनशन पर बैठने की घोषणा आंदोलन को नया रूप दे सकती है। फिलहाल छात्रों का आंदोलन जारी है और सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती युवाओं की मांगों पर भरोसेमंद, पारदर्शी और समयबद्ध कार्रवाई करने की है।

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