मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 के तहत झारखंड में 311 अतिरिक्त सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी नियुक्त किए गए हैं। 24 अगस्त से सुनवाई शुरू होगी।
झारखंड में मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 की प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित करने के लिए सभी जिलों में 311 अतिरिक्त सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग ने जिलों से भेजे गए प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। इन अधिकारियों की नियुक्ति का उद्देश्य विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान दावा एवं आपत्ति से जुड़े मामलों का समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से निपटारा करना है।

अधिकारियों की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 के तहत नोटिस जारी करने, सुनवाई करने, दस्तावेजों के सत्यापन और मतदाता सूची में मौजूद विसंगतियों को दूर करने का काम तेज किया जाना है। दावा एवं आपत्ति चरण में सामने आने वाले मामलों के निपटारे के लिए 5 अगस्त से 3 अक्टूबर 2026 तक की अवधि निर्धारित की गई है।
सभी जिलों में 311 अतिरिक्त अधिकारी नियुक्त
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के अनुसार, सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों से अतिरिक्त सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव मांगे गए थे। जिलों से प्राप्त प्रस्तावों को भारत निर्वाचन आयोग की स्वीकृति के लिए भेजा गया था। आयोग की मंजूरी मिलने के बाद राज्य के सभी जिलों में कुल 311 अतिरिक्त अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई है। इन अधिकारियों की तैनाती से दावा एवं आपत्ति अवधि में आने वाले मामलों के निपटारे में प्रशासनिक क्षमता बढ़ेगी। इससे मतदाताओं को भी अपने मामलों के संबंध में नोटिस, सुनवाई और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

24 अगस्त से शुरू होगी सुनवाई
मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 के दौरान सामने आई विसंगतियों और अन्य मामलों पर सुनवाई की प्रक्रिया 24 अगस्त से शुरू होगी। इसमें नो-मैप मतदाताओं, तार्किक विसंगतियों और मतदाता सूची से जुड़े अन्य मामलों की जांच की जाएगी।अतिरिक्त सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी संबंधित मामलों में आवश्यक नोटिस जारी करेंगे। इसके बाद संबंधित मतदाताओं से दस्तावेज प्राप्त कर उनका सत्यापन किया जाएगा और नियमानुसार मामलों का निष्पादन किया जाएगा।इस व्यवस्था का मकसद यह है कि दावा और आपत्ति से जुड़े मामलों का निपटारा निर्धारित समय सीमा के भीतर हो और किसी पात्र मतदाता को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
नो-मैप और तार्किक विसंगतियों पर भी होगी कार्रवाई
मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान सामने आने वाली नो-मैप श्रेणी और तार्किक विसंगतियां भी अधिकारियों के काम का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगी। इन मामलों में रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
निर्वाचन विभाग का जोर मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाने पर है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को पारदर्शिता के साथ मामलों की जांच और निष्पादन करने की जिम्मेदारी दी गई है।
एक परिवार के मतदाताओं को एक ही मतदान केंद्र पर रखने का प्रयास
के. रवि कुमार ने बताया कि अतिरिक्त सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी SIR के तहत एक परिवार के मतदाताओं को यथासंभव एक ही मतदान केंद्र पर रखने के लिए भी काम करेंगे। इसका उद्देश्य परिवार के सदस्यों के मतदान केंद्रों से जुड़ी व्यावहारिक परेशानियों को कम करना है।
इसके अलावा अधिकारियों को घर-घर जाकर मतदाता सूची से संबंधित कार्यों में सहयोग करने की जिम्मेदारी भी दी गई है। निर्वाचन विभाग का प्रयास है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल रहे।
पात्र मतदाता न छूटे, विदेशी नागरिक शामिल न हो
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 के व्यापक उद्देश्य को भी स्पष्ट किया। इसके तहत यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है कि एक भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रह जाए और कोई विदेशी नागरिक मतदाता सूची में शामिल न हो।
इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए दस्तावेजों की जांच और मामलों का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा। अतिरिक्त अधिकारियों की नियुक्ति से इस प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। साथ ही, मामलों के निपटारे में पारदर्शिता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।
3 अक्टूबर तक मामलों के निपटारे का लक्ष्य
दावा एवं आपत्ति से जुड़े मामलों के समयबद्ध निष्पादन के लिए 5 अगस्त से 3 अक्टूबर 2026 तक की अवधि निर्धारित की गई है। इस दौरान नोटिस, सुनवाई, दस्तावेज सत्यापन और संबंधित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया पूरी की जानी है।
निर्वाचन विभाग के लिए यह चरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची की शुद्धता सीधे चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ी है। किसी पात्र नागरिक का नाम छूटना या गलत नाम शामिल होना दोनों ही स्थितियां निर्वाचन प्रक्रिया के लिए चुनौती पैदा कर सकती हैं।
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SIR प्रक्रिया पूरी होने तक प्रभावी रहेगी नियुक्ति
के. रवि कुमार ने बताया कि 311 अतिरिक्त सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों की नियुक्तियां विशेष गहन पुनरीक्षण–2026 की प्रक्रिया पूरी होने तक प्रभावी रहेंगी। इससे पुनरीक्षण के विभिन्न चरणों में आवश्यक प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध रहेगा। अब 24 अगस्त से शुरू होने वाली सुनवाई पर विशेष नजर रहेगी। दावा-आपत्ति, नो-मैप मतदाता, तार्किक विसंगतियों और दस्तावेज सत्यापन से जुड़े मामलों के निपटारे के बाद मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने की दिशा में अगला चरण आगे बढ़ेगा।
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