झारखंड के खनिज अधिकारों पर कुणाल षाड़ंगी की चेतावनी

NEWS SAGA DESK

कुणाल षाड़ंगी बोले- खनिज राजस्व के अधिकारों से समझौता नहीं, जरूरत पड़ी तो पंचायत स्तर तक होगा आंदोलन

पूर्वी सिंहभूम। झारखंड के खनिज और वित्तीय अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता और पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि राज्य के खनिज अधिकार और वित्तीय स्वायत्तता किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दी जाएगी। रविवार को बिष्टुपुर स्थित परिसदन में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने झारखंड के हितों से जुड़े प्रावधानों पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा।

इसे भी देखें:-युवा वकीलों की समस्याएं बनीं चुनावी मुद्दा, उम्मीदवारों ने दिया समाधान का भरोसा

कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि झारखंड की धरती से निकलने वाले खनिज देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। लेकिन खनन गतिविधियों के कारण विस्थापन, प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान का असर स्थानीय आबादी पर पड़ता है। ऐसे में खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व में राज्य के अधिकारों को सीमित करना झारखंड के साथ आर्थिक अन्याय होगा।

खनिज अधिकारों को लेकर केंद्र पर निशाना

कुणाल षाड़ंगी ने माइंस एंड मिनरल्स डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन संशोधन कानून 2026 के प्रावधानों को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों से राज्यों की खनिज युक्त भूमि पर कर, उपकर और अन्य लेवी लगाने की शक्तियां प्रभावित हो सकती हैं।

झामुमो नेता ने कहा कि झारखंड सरकार पहले ही इस बदलाव का विरोध कर रही है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी केंद्र सरकार से कानून पर पुनर्विचार की मांग कर चुके हैं। उनके मुताबिक, यह केवल राजस्व का विषय नहीं है, बल्कि राज्य की वित्तीय स्वायत्तता और संवैधानिक अधिकारों से भी जुड़ा मामला है।

Read More News

Read More