कतरास-बाघमारा में भू-धंसान से दहशत, पलायन को मजबूर परिवार

NEWS SAGA DESK

कतरास-बाघमारा में भू-धंसान की लगातार घटनाओं से बस्तियां खतरे में हैं। कई परिवार पलायन कर चुके हैं, जबकि 300 मजदूरों के सामने रोजगार का संकट है।

धनबाद के कतरास-बाघमारा कोयलांचल में भू-धंसान की लगातार हो रही घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अवैध खनन के कारण जमीन के कमजोर होने की आशंका के बीच कई बस्तियां डेंजर जोन में आ गई हैं। हालात ऐसे हैं कि प्रभावित परिवार घर छोड़कर पलायन करने को मजबूर हैं, जबकि दूसरी ओर रोजगार और सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।

भू-धंसान

स्थानीय स्तर पर भू-धंसान के खिलाफ आंदोलन जारी है। नेताओं और मंत्रियों के दौरे के बाद प्रभावित लोगों को मुआवजा और न्याय का भरोसा जरूर मिला, लेकिन जमीन पर स्थायी समाधान का इंतजार अब भी बना हुआ है।

लगातार हादसों से दहला कतरास-बाघमारा

इस साल 31 मार्च को टंडाबारी में भू-धंसान की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। इस हादसे में तीन लोगों की मलबे में दबकर मौत हो गई। इसके बाद 23 अप्रैल की आधी रात को उसी क्षेत्र में दोबारा जमीन धंस गई। बताया गया कि करीब 20 से 25 घर लगभग 20 फीट गहरी खाई में समा गए।

घटना के बाद बीसीसीएल प्रबंधन ने टंडाबाड़ी बस्ती को खाली करा दिया। लोग अभी इस हादसे से उबर भी नहीं पाए थे कि अगस्त में फिर लगातार घटनाएं सामने आने लगीं।

भू-धंसान

चार अगस्त को कतरास के सेलेक्टेड गोविंदपुर क्षेत्र में भू-धंसान से करीब आधा दर्जन घर जमींदोज हो गए। इसके कुछ दिन बाद सात अगस्त को छाताबाद में हुई घटना ने इलाके में फिर दहशत पैदा कर दी।

करीब 100 परिवार कर चुके हैं पलायन

छाताबाद की घटना के बाद प्रभावित बस्ती से करीब 100 परिवारों के पलायन की बात सामने आई है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे परिवारों की है जो रोज कमाकर अपना घर चलाते हैं। घर और रोजगार दोनों पर संकट आने से लोगों के सामने भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जब जमीन के नीचे क्या स्थिति है, यह स्पष्ट नहीं है तो बस्तियों में रहना जोखिम भरा हो गया है। दूसरी ओर, प्रभावित इलाकों में चल रहा आंदोलन भी आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर रहा है।

भू-धंसान

भू-धंसान के खिलाफ आंदोलन के कारण आउटसोर्सिंग का काम प्रभावित हुआ है। इससे कंपनी को आर्थिक नुकसान होने के साथ बड़ी संख्या में मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

300 मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट

छाताबाद क्षेत्र में स्थिति और गंभीर हो गई है। घटना के बाद कंपनी की ओर से नो वर्क, नो पे का नोटिस चिपकाए जाने की जानकारी है। इसके चलते करीब 300 मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।

एक तरफ लोगों के घर और जमीन की सुरक्षा का सवाल है, तो दूसरी तरफ काम बंद होने से आय का जरिया भी प्रभावित हुआ है। ऐसे में ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन और प्रबंधन सुरक्षा के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के रोजगार और पुनर्वास की ठोस व्यवस्था करे।

भू-धंसान

नेताओं के दौरे से जगी उम्मीद, लेकिन समाधान का इंतजार

घटनाओं के बाद कई जनप्रतिनिधि और नेता प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे। धनबाद सांसद ढुलू महतो, मेयर संजीव सिंह, पूर्व विधायक जलेश्वर महतो, पूर्व बियाडा अध्यक्ष विजय झा, झारखंड सरकार के मुख्य सचेतक मथुरा प्रसाद महतो, मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, मंत्री हफीजुल हसन और कांग्रेस जिलाध्यक्ष संतोष सिंह ने घटनास्थल का दौरा किया।

नेताओं ने प्रभावित लोगों को मुआवजा और न्याय दिलाने का भरोसा दिया। हालांकि ग्रामीणों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि आश्वासन कब स्थायी समाधान में बदलेगा। लोगों की सबसे बड़ी चिंता सुरक्षित आवास, पुनर्वास और भविष्य में ऐसे हादसों की रोकथाम को लेकर है।

रेस्क्यू और तकनीकी जांच की तैयारी

घटनास्थल को बेहद संवेदनशील और खतरनाक मानते हुए प्रबंधन ने रेस्क्यू टीम के साथ बातचीत के बाद हैवी मशीनों से रास्ता बनाने का काम शुरू किया है। मशीनों की मदद से फुटबॉल मैदान के पास बने मुहानों तक जाने वाले रास्ते को साफ किया गया है।

रास्ता तैयार होने के बाद रेस्क्यू टीम अंदर जाकर जमींदोज हुए सामानों की स्थिति का जायजा लेगी और जरूरी सामान को बाहर निकालने का प्रयास करेगी। इसके साथ ही तकनीकी टीम भूमिगत क्षेत्र की स्थिति का अध्ययन करेगी।

टीम यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित अवैध खनन कितनी दूर तक हुआ और किन हिस्सों में पिलर काटे गए हैं। भूमिगत खतरे का आकलन करने के बाद विस्तृत रिपोर्ट क्षेत्रीय प्रबंधन को सौंपे जाने की बात कही गई है।

सेटेलाइट वीडियो से भी सामने आई भूमिगत स्थिति

प्रबंधन के अनुसार घटनास्थल का क्षेत्र बेहद खतरनाक है। सेटेलाइट वीडियो में जमीन के नीचे पिलर काटे जाने और सतह के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति सामने आने की बात कही गई है।

रास्ता बनाने के दौरान कथित अवैध मुहानों के पास काली माता की तस्वीर, बीड़ी-सिगरेट और शराब की बोतलें सहित अन्य सामान मिलने की जानकारी भी सामने आई है। इन चीजों की मौजूदगी से वहां लोगों की आवाजाही और गतिविधियों के संकेत मिले हैं।

फिलहाल प्रबंधन की टीमें इलाके की स्थिति का आकलन कर रही हैं। जमीन और आसपास के मकानों का सर्वे भी जारी है, ताकि खतरे वाले हिस्सों की पहचान की जा सके।

पीड़ितों के लिए राहत शिविर

एजीएम डीके सिंह के मुताबिक घटनास्थल के पास रास्ता तैयार किया गया है। एक टीम जमींदोज हुए सामान की रिकवरी पर काम करेगी, जबकि दूसरी टीम इलाके की सुरक्षा स्थिति का अध्ययन करेगी। सर्वे का काम भी जारी है।

उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से प्रभावित परिवारों के लिए राहत शिविर भी चलाया जा रहा है। हालांकि प्रभावित लोगों की दीर्घकालिक जरूरतों को देखते हुए पुनर्वास और सुरक्षित आवास की व्यवस्था अहम मुद्दा बनी हुई है।


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जरलाही बस्ती को खाली करने का नोटिस

इधर, न्यू आकाश किनारी कोलियरी के अंतर्गत आकाश किनारी कांटा स्थित जरलाही बस्ती को लेकर भी खतरे की चेतावनी जारी की गई है। बीसीसीएल गोंविंदपुर एरिया प्रबंधन ने बस्ती को डेंजर जोन घोषित करते हुए लोगों से इलाका खाली करने को कहा है।

नोटिस में बस्ती में रहना खतरनाक बताते हुए कभी भी भू-धंसान होने की आशंका जताई गई है। नोटिस चिपकने के बाद ग्रामीणों में चिंता और बढ़ गई है।

कतरास-बाघमारा में लगातार सामने आ रही घटनाएं सिर्फ जमीन धंसने का मामला नहीं रह गई हैं। यह सुरक्षा, पुनर्वास, रोजगार और पर्यावरणीय जोखिम से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुकी हैं। अब प्रभावित लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच और सर्वे के बाद प्रशासन व प्रबंधन कितनी जल्दी ठोस कदम उठाते हैं और कितने परिवारों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाता है।

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