नेपाल बाढ़ से भारत को खतरा, 200 ग्लेशियर झीलों ने बढ़ाई चिंता

NEWS SAGA DESK

नेपाल बाढ़ ने भारत के हिमालयी क्षेत्रों की ग्लेशियर झीलों पर चिंता बढ़ाई है। 200 झीलें उच्च जोखिम में हैं, जिनसे बिहार और बंगाल में बाढ़ का खतरा है।

नेपाल बाढ़ की भयावह तस्वीरों ने हिमालयी क्षेत्र में मौजूद ग्लेशियर झीलों को लेकर भारत के लिए भी गंभीर चेतावनी पैदा कर दी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर झील टूटने के बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में अचानक आई बाढ़ ने मध्य नेपाल के कई इलाकों को प्रभावित किया है। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर इसी तरह की कोई घटना भारतीय हिमालयी क्षेत्र में हुई, तो उसका असर कितना व्यापक हो सकता है।

नेपाल बाढ़

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारतीय हिमालयी क्षेत्र की 11 नदी घाटियों में हजारों ग्लेशियर झीलें मौजूद हैं। इनमें से करीब 7,500 झीलें भारत में स्थित हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी एनडीएमए ने इनमें से लगभग 195 से 200 झीलों को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में चिह्नित किया है। यही वजह है कि नेपाल बाढ़ के बाद इन झीलों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है।

इन राज्यों में मौजूद हैं संवेदनशील झीलें

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में 48, सिक्किम में 40, लद्दाख में 35, अरुणाचल प्रदेश में 28, जम्मू-कश्मीर में 26 और उत्तराखंड में 13 संवेदनशील ग्लेशियर झीलें चिह्नित की गई हैं।

इन राज्यों में झीलों की निगरानी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी बड़े प्राकृतिक बदलाव की स्थिति में नीचे की ओर बहने वाली नदियों में अचानक पानी बढ़ सकता है। पहाड़ी इलाकों में इसका असर सड़क, पुल, बस्तियों और अन्य बुनियादी ढांचे पर भी पड़ सकता है।

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उत्तर बिहार और उत्तर बंगाल तक पहुंच सकता है पानी

ग्लेशियर झीलों का खतरा केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं है। नेपाल या सिक्किम क्षेत्र में किसी बड़ी झील के टूटने की स्थिति में उसका पानी नदियों के जरिए मैदानी क्षेत्रों तक पहुंच सकता है।

कोसी, गंडक और तीस्ता जैसी नदियां इस लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। अचानक बड़ी मात्रा में पानी और गाद आने पर उत्तर बिहार के सुपौल, सहरसा, मधुबनी और चंपारण जैसे क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

इसी तरह उत्तर बंगाल में जलपाईगुड़ी, सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग के तराई क्षेत्रों पर भी असर पड़ने की आशंका हो सकती है। तेज बहाव और अतिरिक्त गाद से तटबंधों पर दबाव बढ़ने का खतरा रहता है।

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