टीएसडीपीएल कैंटीन शुल्क 100 रुपये बढ़ा, कर्मचारियों में नाराजगी

टीएसडीपीएल कैंटीन शुल्क 250 से बढ़ाकर 350 रुपये किया गया है। 100 रुपये की बढ़ोतरी से कर्मचारियों में नाराजगी और यूनियन के रुख पर सवाल उठे।

News Saga Desk

पूर्वी सिंहभूम। जमशेदपुर में टीएसडीपीएल कैंटीन शुल्क बढ़ाए जाने के बाद कर्मचारियों के एक वर्ग में नाराजगी सामने आई है। टाटा स्टील डाउनस्ट्रीम प्रोडक्ट्स लिमिटेड (TSDPL) प्रबंधन ने गुरुवार को जारी नोटिस के जरिए कर्मचारियों के मासिक कैंटीन शुल्क में 100 रुपये की बढ़ोतरी की है। अब कर्मचारियों को कैंटीन सुविधा के लिए हर महीने 350 रुपये का भुगतान करना होगा, जबकि पहले यह शुल्क 250 रुपये था।

शुल्क में अचानक हुई इस बढ़ोतरी को लेकर कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि पहले से मौजूद आर्थिक दबाव के बीच कैंटीन शुल्क बढ़ने से उन पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। वहीं, कंपनी प्रबंधन की ओर से शुल्क बढ़ाने के पीछे क्या कारण है, इसे लेकर कर्मचारियों के बीच अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

250 से बढ़कर 350 रुपये हुआ मासिक शुल्क

प्रबंधन के नोटिस के बाद टीएसडीपीएल कैंटीन शुल्क सीधे 100 रुपये बढ़ गया है। यानी कर्मचारियों को अब पहले की तुलना में हर महीने 40 प्रतिशत अधिक राशि कैंटीन सुविधा के लिए देनी होगी। इस फैसले के बाद कर्मचारियों के बीच इसे लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

टीएसडीपीएल कैंटीन

कुछ कर्मचारियों का कहना है कि कैंटीन शुल्क में बढ़ोतरी का प्रावधान ग्रेड रिवीजन के दौरान ही तय किया गया था। वहीं, कर्मचारियों के दूसरे वर्ग का मानना है कि शुल्क बढ़ोतरी को कैंटीन में मिलने वाली सुविधाओं और भोजन की गुणवत्ता में सुधार से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

हालांकि, एक वर्ग इसे प्रबंधन का एकतरफा फैसला मान रहा है। यही वजह है कि कर्मचारियों के बीच इस फैसले को लेकर पूरी तरह स्पष्टता नहीं बन पाई है।

यूनियन के रुख को लेकर कर्मचारियों में असमंजस

कैंटीन शुल्क बढ़ने के बाद कर्मचारियों की निगाह अब यूनियन नेतृत्व के रुख पर भी टिकी है। कर्मचारियों का आरोप है कि यूनियन नेतृत्व की ओर से इस मुद्दे पर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं रखी जा रही है। कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि यूनियन पदाधिकारी अलग-अलग माध्यमों से शुल्क बढ़ोतरी को लेकर अलग-अलग बातें बता रहे हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि यदि टीएसडीपीएल कैंटीन शुल्क बढ़ाने का फैसला पहले से तय था तो यूनियन और प्रबंधन की ओर से इसकी स्पष्ट जानकारी कर्मचारियों को दी जानी चाहिए थी। इससे मौजूदा असमंजस को कम किया जा सकता था।

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ग्रेड रिवीजन से जोड़कर देख रहे कर्मचारी

कैंटीन शुल्क बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब कंपनी के कर्मचारियों के एक वर्ग में हालिया ग्रेड रिवीजन को लेकर पहले से असंतोष की चर्चा है। कर्मचारियों का कहना है कि ग्रेड रिवीजन का समझौता यदि समय पर हो जाता तो मौजूदा परिस्थितियों में होने वाले संभावित नुकसान से बचा जा सकता था।

कर्मचारियों के दावे के मुताबिक ग्रेड रिवीजन की अवधि छह वर्ष से बढ़ाकर सात वर्ष कर दी गई है। इसके अलावा वेतन में हुई बढ़ोतरी भी उनकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं रही। इन मुद्दों के कारण ग्रेड रिवीजन के बाद यूनियन नेतृत्व को लेकर कर्मचारियों के एक वर्ग में नाराजगी बनी हुई है।

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