MMDR संशोधन से झारखंड में बढ़ेंगे निवेश और रोजगार: अन्नपूर्णा देवी

MMDR संशोधन पर अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि झारखंड में निवेश और रोजगार बढ़ेंगे। जानिए केंद्र और राज्य के बीच खनिज राजस्व को लेकर क्या है पूरा विवाद।

News Saga Desk

रांची। MMDR संशोधन को लेकर झारखंड में केंद्र और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक और नीतिगत बहस तेज है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने शनिवार को कहा कि संशोधित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) कानून से झारखंड में निवेश और रोजगार के नए अवसर बढ़ सकते हैं। उनका कहना है कि खनन क्षेत्र में कर व्यवस्था अधिक एकरूप होने से कारोबार में अनिश्चितता कम होगी और इसका लाभ स्थानीय स्तर पर युवाओं को रोजगार के रूप में मिल सकता है।

केंद्रीय मंत्री ने यह बात भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कही। दूसरी ओर, झारखंड सरकार संशोधन के कुछ प्रावधानों को राज्य के खनिज राजस्व और वित्तीय अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण मानते हुए इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।

MMDR संशोधन से निवेश बढ़ने का दावा

अन्नपूर्णा देवी के अनुसार, झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां खनन से जुड़े उद्योगों के लिए स्पष्ट तथा समान नियम जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि नीलामी के बाद अलग-अलग प्रकार के कर और सेस लगाए जाने से कारोबारियों के सामने कई बार अनिश्चितता पैदा होती थी। MMDR संशोधन के बाद कर व्यवस्था में एकरूपता आने से इस तरह की दिक्कतें कम हो सकती हैं।

केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि नियमों में स्पष्टता आने से छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों के लिए कारोबार करना आसान होगा। उनके अनुसार, निवेश बढ़ने से रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं और झारखंड से होने वाले पलायन को कम करने में मदद मिल सकती है।

केंद्र सरकार ने भी संशोधित कानून को खनन क्षेत्र के लिए अधिक स्थिर और समान वित्तीय ढांचे से जोड़ते हुए कहा है कि ऊंचे और अप्रत्याशित शुल्क निवेश तथा रोजगार पर असर डाल सकते हैं। केंद्र के अनुसार, संशोधन का उद्देश्य निवेश का भरोसा बढ़ाना और खनिज आधारित विकास को गति देना है।

कानून में क्या बदला है?

MMDR संशोधन के तहत राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर लगाए जाने वाले कुछ कर, सेस और अन्य लेवी को लेकर नई पाबंदियां लागू की गई हैं। नए प्रावधानों में ऐसे शुल्कों को खनिज की मात्रा, खनिज मूल्य या रॉयल्टी जैसे आधारों से जोड़ने की स्थिति में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों और प्रतिबंधों का प्रावधान किया गया है।

MMDR

केंद्र सरकार का कहना है कि इस बदलाव से पूरे देश में खनन क्षेत्र के लिए अधिक समान व्यवस्था बनेगी। PIB के अनुसार, संशोधन के बाद राज्यों को खनन से मिलने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा पहले की तरह मिलता रहेगा और कानून का उद्देश्य निवेश तथा खनन गतिविधियों के लिए स्थिर वातावरण तैयार करना है।

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झारखंड सरकार क्यों कर रही है विरोध?

झारखंड सरकार का रुख केंद्र के दावे से अलग है। राज्य सरकार का कहना है कि संशोधन से खनिज सेस के जरिए राजस्व जुटाने की उसकी क्षमता प्रभावित हो सकती है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा है कि राज्य सरकार कानून के खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाएगी और खनिज सेस से जुड़े अपने दावों को जारी रखेगी।

राज्य सरकार ने खनिज सेस से वित्तीय वर्ष 2026-27 में लगभग 14 हजार करोड़ रुपये की संभावित आय का भी उल्लेख किया है। इसके अलावा राज्य ने पुराने खनिज संबंधी बकाये के अपने दावे को भी विवाद का हिस्सा बताया है।

यह विवाद उस समय और महत्वपूर्ण हो गया जब 2024 में सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने खनिज अधिकारों पर राज्यों की कर लगाने की शक्ति से संबंधित महत्वपूर्ण फैसला दिया था। 2026 के संशोधन ने इसी क्षेत्र में नया वैधानिक ढांचा तैयार किया है।

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