झारखंड बंद के दौरान पलामू के रेडमा चौक पर तीन घंटे तक जाम रहा। झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा ने पेंशन, नौकरी में आरक्षण समेत छह मांगें उठाईं।
News Saga Desk
पलामू। झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर बुधवार को आयोजित झारखंड बंद का असर पलामू जिले में भी देखने को मिला। बंद को सफल बनाने के लिए मोर्चा के सदस्य सुबह से ही सड़कों पर उतर आए। मेदिनीनगर के रेडमा चौक को सुबह 7:30 बजे जाम कर दिया गया, जिससे यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। करीब तीन घंटे तक चले इस प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने अपनी छह सूत्री मांगों को पूरा करने की मांग उठाई। इनमें आंदोलनकारियों की सम्मान राशि बढ़ाने, पेंशन और आश्रितों को नौकरी में आरक्षण देने जैसी मांगें शामिल हैं। प्रशासन के हस्तक्षेप और समझाने के बाद सुबह 10:30 बजे जाम हटाया गया।
झारखंड बंद के दौरान रेडमा चौक पर प्रदर्शन
बुधवार सुबह झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के सदस्य बड़ी संख्या में मेदिनीनगर के रेडमा चौक पहुंचे। यहां उन्होंने सड़क जाम कर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने सरकार से लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने का आग्रह किया।
सुबह 7:30 बजे शुरू हुआ सड़क जाम करीब तीन घंटे तक जारी रहा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि अलग झारखंड राज्य के गठन के लिए संघर्ष करने वाले आंदोलनकारियों को अब तक अपेक्षित सम्मान और सुविधाएं नहीं मिली हैं।

प्रदर्शन के कारण रेडमा चौक से गुजरने वाले वाहनों की आवाजाही बाधित हो गई। स्कूल बसों, यात्री वाहनों और छोटे-बड़े अन्य वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इससे आम लोगों, विद्यार्थियों और यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद हटा जाम
रेडमा चौक पर सड़क जाम की सूचना मिलने के बाद सदर अंचल अधिकारी अमरदीप मल्होत्रा और थाना प्रभारी ज्योति लाल रजवार मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया।
काफी देर तक चली बातचीत के बाद आंदोलनकारियों ने सुबह करीब 10:30 बजे जाम समाप्त कर दिया। इस दौरान प्रशासन और मोर्चा के सदस्यों के बीच उनकी मांगों को लेकर वार्ता भी हुई।

सदर अंचल अधिकारी अमरदीप मल्होत्रा ने आश्वासन दिया कि आंदोलनकारियों की मांगों को उपायुक्त के माध्यम से झारखंड सरकार तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही, इन मांगों को पूरा करने के लिए सरकार से आग्रह किया जाएगा।
प्रशासन के आश्वासन के बाद सड़क से प्रदर्शनकारियों के हटने पर यातायात सामान्य करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
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सरकार पर वादे पूरे नहीं करने का लगाया आरोप
प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने हेमंत सोरेन सरकार पर उनकी मांगों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि लंबे समय से आंदोलनकारियों को सम्मान, पेंशन और अन्य सुविधाएं देने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
मोर्चा के सदस्यों ने आरोप लगाया कि सरकार की घोषणाओं और जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन में अंतर है। उन्होंने कहा कि लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। इसी कारण उन्हें झारखंड बंद का आह्वान करना पड़ा।
मोर्चा के जिला अध्यक्ष चंद्रधन सिंह ने कहा कि अलग झारखंड राज्य के गठन के 26 वर्ष बाद भी आंदोलनकारियों और युवाओं की कई अपेक्षाएं पूरी नहीं हुई हैं। उनके अनुसार, बंद के माध्यम से आंदोलनकारियों ने अपने हक और अधिकारों की आवाज उठाई है।
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