मौत के एक साल बाद मृत व्यक्ति के नाम जमीन का म्यूटेशन! रांची में उठे बड़े सवाल

रांची के नामकुम अंचल से जमीन के म्यूटेशन को लेकर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने राजस्व व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जिस व्यक्ति की मृत्यु 31 अगस्त 2024 को हो चुकी थी, उसके नाम पर वर्ष 2025 में जमीन का म्यूटेशन कर दिया गया

NEWS SAGA DESK:

रांची के नामकुम अंचल से जमीन के म्यूटेशन को लेकर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने राजस्व व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जिस व्यक्ति की मृत्यु 31 अगस्त 2024 को हो चुकी थी, उसके नाम पर वर्ष 2025 में जमीन का म्यूटेशन कर दिया गया। पीड़ित पक्ष का दावा है कि नगर निगम के रिकॉर्ड में भी संबंधित व्यक्ति की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

मामला हेथू की रहने वाली सुशीला देवी की करीब 1 एकड़ 39 डिसमिल जमीन से जुड़ा बताया जा रहा है। सुशीला देवी का आरोप है कि कुछ लोगों ने उनकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की। इसके बाद उन्होंने मामले को लेकर थाना, एसएसपी, डीसी और एलआरडीसी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। म्यूटेशन को रद्द कराने के लिए एलआरडीसी कोर्ट में भी अपील की गई है।

पीड़ित पक्ष के मुताबिक, विवादित जमीन के म्यूटेशन के लिए दिया गया आवेदन अंचल कार्यालय की ओर से पहले तीन बार खारिज किया जा चुका था। आरोप है कि इसके बावजूद चौथी बार उसी जमीन का म्यूटेशन स्वीकार कर लिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस व्यक्ति की मृत्यु पहले ही हो चुकी थी, उसके नाम पर बाद में जमीन का म्यूटेशन किस आधार पर किया गया। इसी को लेकर पीड़ित पक्ष ने राजस्व प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

मामले में एक शपथ पत्र का भी जिक्र किया जा रहा है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जिस शपथ पत्र के आधार पर म्यूटेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ी, उसमें शपथ लेने वाले व्यक्ति का हस्ताक्षर तक मौजूद नहीं है। अगर यह आरोप सही पाया जाता है तो म्यूटेशन की प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की जांच भी महत्वपूर्ण हो सकती है।जमीन विवाद को लेकर पीड़ित पक्ष ने पुलिस और प्रशासन के अलग-अलग अधिकारियों से शिकायत की है। थाना और एसएसपी के अलावा डीसी तथा एलआरडीसी कार्यालय में भी मामला उठाया गया है। वहीं म्यूटेशन को रद्द कराने के लिए एलआरडीसी कोर्ट में अपील की गई है।

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मृत्यु के बाद संबंधित व्यक्ति के नाम पर जमीन का म्यूटेशन किस आधार पर हुआ और पहले तीन बार खारिज किए गए आवेदन को चौथी बार किन परिस्थितियों में मंजूरी मिली। पीड़ित पक्ष ने पूरे मामले की जांच और विवादित म्यूटेशन को रद्द करने की मांग की है। अब प्रशासनिक जांच और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल से ही स्पष्ट होगा कि म्यूटेशन की प्रक्रिया में वास्तव में क्या हुआ।

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