UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क के विरोध में जामताड़ा के गांधी चौक पर व्यापारियों ने धरना दिया। 15 अक्टूबर तक फैसला वापसी की मांग।
डिजिटल इंडिया अभियान की रीढ़ बन चुके एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) के व्यावसायिक उपयोग पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के प्रस्ताव ने देश भर के कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। इसी कड़ी में गुरुवार को झारखंड के जामताड़ा स्थित ऐतिहासिक गांधी चौक पर जामताड़ा जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के बैनर तले व्यापारियों ने एक घंटे का उपवास रखकर विरोध प्रदर्शन किया और मौन धरना दिया।

इस सांकेतिक विरोध प्रदर्शन में चैंबर के पदाधिकारियों के साथ-साथ जामताड़ा शहर और आसपास के क्षेत्रों के बड़ी संख्या में स्थानीय व्यापारी, दुकानदार और व्यवसायी शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय से इस प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है।
0.4% MDR शुल्क से बिगड़ेगा व्यापारियों का बजट
धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जामताड़ा जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि व्यावसायिक UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत या उससे अधिक MDR शुल्क लागू किया जाता है, तो इसका सीधा वित्तीय नुकसान छोटे व मंझोले व्यापारियों को उठाना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि कम मार्जिन पर व्यापार करने वाले दुकानदारों का बजट इस फैसले से पूरी तरह बिगड़ जाएगा। अंततः इसका अतिरिक्त बोझ आम उपभोक्ताओं की जेब पर ही पड़ेगा, जिससे महंगाई में और बढ़ोतरी होगी। अग्रवाल ने याद दिलाया कि देश भर के व्यापारी वर्ग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान को सफल बनाने में रात-दिन एक कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन अब उसी डिजिटल व्यवस्था पर शुल्क थोपना व्यापारियों के साथ अन्याय है। संजय अग्रवाल ने जानकारी दी कि व्यापारियों के शीर्ष संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) का रुख किया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
जामताड़ा चैंबर के अध्यक्ष ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 15 अक्टूबर से पहले MDR शुल्क लागू करने का प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया, तो देश भर के व्यापारी UPI के माध्यम से भुगतान स्वीकार न करने का कड़ा फैसला ले सकते हैं। इसके लिए जल्द ही एक राष्ट्रव्यापी रणनीति तैयार की जाएगी और व्यापारी पुनः नकद (Cash) लेनदेन को प्राथमिकता देने पर मजबूर होंगे।
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