आरबीआई (RBI) ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की बढ़ोतरी की है। जानें होम लोन, कार लोन और एफडी पर इसका क्या असर पड़ेगा तथा ईएमआई का गणित कैसे बदलेगा।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने देश में लगातार बढ़ रहे महंगाई के दबाव को नियंत्रित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दर यानी रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25 प्रतिशत) की बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले के बाद देश में होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन समेत सभी तरह के कर्ज महंगे हो जाएंगे, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं के मासिक बजट और ईएमआई (EMI) पर पड़ेगा।

मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट कर दिया कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में किसी भी कटौती की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि आरबीआई का अगला कदम देश की आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई के रुख पर निर्भर करेगा। ऐसे में दरों में या तो और इजाफा हो सकता है या इन्हें इसी स्तर पर स्थिर रखा जाएगा। बैंक अब धीरे-धीरे इस बढ़ोतरी का बोझ अपने ग्राहकों पर ट्रांसफर करना शुरू करेंगे।
होम लोन धारकों पर पड़ेगा सबसे बड़ा असर
टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ तारकेश्वर नाथ वैष्णव के अनुसार, इस फैसले का सबसे सीधा और बड़ा असर उन होम लोन ग्राहकों पर पड़ेगा जिन्होंने फ्लोटिंग रेट पर कर्ज ले रखा है। चूंकि फ्लोटिंग रेट लोन सीधे एक्सटर्नल बेंचमार्क यानी रेपो रेट से जुड़े होते हैं, इसलिए ब्याज दरें बढ़ते ही ग्राहकों के पास दो विकल्प होंगे—या तो वे अपनी मासिक ईएमआई की राशि बढ़ाएं या फिर अपने लोन का टेन्योर (अवधि) लंबा करवाएं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, 25 बेसिस प्वाइंट की इस बढ़ोतरी का असर विभिन्न लोन अमाउंट पर कुछ इस तरह दिखेगा:
- 50 लाख रुपये का होम लोन (25 साल के लिए): हर महीने की ईएमआई करीब ₹816 बढ़ जाएगी। कुल लोन अवधि के दौरान ग्राहक को लगभग ₹2.45 लाख अतिरिक्त ब्याज देना होगा।
- 40 लाख रुपये का होम लोन: मासिक ईएमआई में लगभग ₹654 की बढ़ोतरी होगी।
- 30 लाख रुपये का होम लोन: मासिक ईएमआई में लगभग ₹490 का इजाफा होगा।
यदि कोई ग्राहक अपनी मासिक ईएमआई की राशि में बदलाव नहीं करता है, तो उसके 25 साल के लोन की चुकाने की अवधि लगभग 22 महीने और बढ़ जाएगी, यानी लोन 27 साल में जाकर पूरा होगा।
रियल एस्टेट सेक्टर और फिक्स्ड रेट ग्राहकों पर प्रभाव
तारकेश्वर नाथ वैष्णव का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल के दामों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया के हालातों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से जारी त्योहारी सीजन के दौरान रियल एस्टेट की बिक्री पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा, लेकिन त्योहार खत्म होने के बाद रियल एस्टेट बाजार में मांग सुस्त पड़ सकती है। वहीं, जिन ग्राहकों ने पहले से फिक्स्ड रेट पर लोन ले रखा है, उनकी मौजूदा ईएमआई पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, भविष्य में नया लोन लेने या रीफाइनेंस कराने पर उन्हें ऊंची दरों का सामना करना पड़ेगा।रिजर्व बैंक ने यह कड़ा कदम मुख्य रूप से 5.2 प्रतिशत की अनुमानित महंगाई दर को नियंत्रित करने और बाजार में अत्यधिक नकदी के प्रवाह को कम करने के लिए उठाया है। ऊंची ब्याज दरों से कंपनियों के विस्तार और क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है, लेकिन आरबीआई को भरोसा है कि देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत है। इसी भरोसे के आधार पर केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।
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