नेपाल आपदा: लापता लोगों के मृत्यु पंजीकरण की राह आसान

NEWS SAGA DESK

नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी आपदा में लापता लोगों के मृत्यु पंजीकरण को आसान बनाने के लिए दो कानूनों में ‘फास्ट ट्रैक’ संशोधन की तैयारी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

नेपाल के भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा के बाद लापता हुए दर्जनों नागरिकों के परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। नेपाल सरकार लापता लोगों के मृत्यु पंजीकरण (Death Registration) की जटिल प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाने के लिए दो प्रमुख कानूनों में संशोधन करने जा रही है। इस पूरी कवायद को ‘फास्ट ट्रैक’ प्रक्रिया के जरिए अंजाम दिया जाएगा, ताकि प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द राहत राशि, मुआवजा और अन्य कानूनी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

नेपाल के भोटेकोशी और त्रिशूली नदी
संसदीय समिति की बैठक में हुआ निर्णय

काठमांडू के सिंहदरबार में आयोजित भोटेकोशी-त्रिशूली आपदा संबंधी संसदीय विशेष समिति की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। बैठक को संबोधित करते हुए गृह मंत्रालय के सचिव केदारनाथ शर्मा और कानून, न्याय तथा संसदीय मामलों के मंत्रालय के सहसचिव सुभाष भट्टराई ने स्वीकार किया कि वर्तमान कानूनी प्रावधानों की जटिलता के कारण आपदा प्रभावित परिवारों को सरकारी राहत और मुआवजा पाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

गृह मंत्रालय की सिफारिश पर कानून मंत्रालय अब निम्नलिखित दो मुख्य अधिनियमों में प्राथमिकता के आधार पर संशोधन की तैयारी में जुट गया है:

  1. आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन अधिनियम
  2. राष्ट्रीय परिचयपत्र तथा पंजीकरण अधिनियम
जटिल कानूनी प्रक्रिया और ‘फास्ट ट्रैक’ की जरूरत

कानून मंत्रालय के सहसचिव सुभाष भट्टराई ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में लागू मुलुकी देवानी संहिता में किसी भी व्यक्ति के लापता होने पर उसकी मृत्यु की आधिकारिक घोषणा और पंजीकरण की प्रक्रिया बहुत लंबी व समय लेने वाली है। मौजूदा कानून आपदा जैसी आपातकालीन स्थितियों के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

उन्होंने बताया कि यदि संसद का अधिवेशन सत्र चालू नहीं भी होता है, तो भी अध्यादेश या अन्य त्वरित विकल्पों के जरिए इन संशोधनों को तुरंत प्रभाव से लागू करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि पीड़ित परिवारों को महीनों या सालों तक का इंतजार न करना पड़े।

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