बाजार में पपीता खरीदते समय क्या आप भी सिर्फ उसका रंग और नरमपन देखते हैं? हर चमकदार और मुलायम पपीता प्राकृतिक तरीके से पका हो, यह जरूरी नहीं। FSSAI के मुताबिक फलों को पकाने के लिए नियंत्रित एथिलीन का इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि कैल्शियम कार्बाइड के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है। पपीता खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें
NEWS SAGA DESK:
बाजार में पपीता खरीदते समय अगर आप सिर्फ उसका रंग, नरमपन और बाहरी चमक देखकर उसे अच्छा मान लेते हैं, तो अब थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। हर पीला या लाल और मुलायम पपीता प्राकृतिक तरीके से पका हुआ हो, यह जरूरी नहीं है। फलों को जल्दी पकाने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है, ऐसे में पपीता खरीदते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के मुताबिक, फलों को पकाने के लिए नियंत्रित तरीके से एथिलीन गैस का इस्तेमाल किया जा सकता है। एथिलीन पौधों में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला हार्मोन है और फलों के पकने की प्रक्रिया में इसकी भूमिका होती है।
सिर्फ रंग देखकर न खरीदें पपीता
पपीता खरीदते समय केवल उसके रंग को देखकर यह तय करना मुश्किल है कि वह किस तरीके से पका है। इसलिए फल को खरीदने से पहले उसकी बाहरी स्थिति भी अच्छी तरह जांचें।
अगर पपीता जरूरत से ज्यादा दबा हुआ है, उसकी त्वचा पर असामान्य दाग हैं या फल खराब दिखाई दे रहा है, तो उसे खरीदने से बचें। बहुत ज्यादा नरम फल भी जल्दी खराब हो सकता है।
एक साथ ज्यादा पका पपीता खरीदने से बचें
अगर पपीता पूरी तरह पक चुका है और उसे तुरंत खाना है, तो जरूरत के मुताबिक ही खरीदना बेहतर है। बहुत ज्यादा पका फल लंबे समय तक रखने पर जल्दी खराब हो सकता है।
वहीं, अगर पपीता हल्का कच्चा है, तो उसे सामान्य कमरे के तापमान पर रखकर प्राकृतिक रूप से पकने दिया जा सकता है। इस तरह जरूरत के हिसाब से पपीता खरीदना और उसका सही तरीके से भंडारण करना ज्यादा व्यावहारिक है।
खरीदारी के समय इन बातों का रखें ध्यान
पपीता खरीदते समय सिर्फ उसका रंग या मुलायमपन ही न देखें। फल की पूरी बाहरी स्थिति जांचें, अत्यधिक दबे या खराब हिस्से वाले फल से बचें और जरूरत के मुताबिक ही मात्रा खरीदें। खाने से पहले फल को अच्छी तरह धोना भी जरूरी है।
No Comment! Be the first one.