यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम जेएनयू से बर्खास्त

NEWS SAGA DESK

जेएनयू ने यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के बाद कांग्रेस सांसद प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। आंतरिक समिति की सिफारिश पर यह कार्रवाई की गई है। पूरी खबर पढ़ें।

राष्ट्रीय राजधानी स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) प्रशासन ने एक कड़ा और कड़ाकात्मक कदम उठाते हुए स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के प्रोफेसर और मणिपुर से कांग्रेस लोकसभा सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम (Angomcha Bimol Akoijam) को तत्काल प्रभाव से विश्वविद्यालय की सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विश्वविद्यालय की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यह अनुशासनात्मक कार्रवाई आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee) की जांच रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों के आधार पर की गई है।

राष्ट्रीय राजधानी स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU)

प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम के खिलाफ जेएनयू की कुछ छात्राओं द्वारा यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) की औपचारिक शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। इन गंभीर शिकायतों के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंतरिक शिकायत समिति को मामले की निष्पक्ष जांच करने का जिम्मा सौंपा था।

समिति ने अपनी जांच प्रक्रिया पूरी करने के बाद विस्तृत रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपी। इस रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों के आधार पर आंतरिक समिति ने यूजीसी (UGC) के सेवा नियमों तथा सेंट्रल सिविल सर्विसेज (CCS – Classification, Control and Appeal) नियमावली के सुसंगत नियमों के तहत प्रोफेसर अकोइजम को ‘कड़ी सजा’ (Major Penalty) देने की सिफारिश की थी। समिति की सिफारिशों का अध्ययन करने के बाद जेएनयू प्रशासन ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का यह सख्त फैसला लिया है।

इनर मणिपुर से कांग्रेस के सांसद हैं अकोइजम

उल्लेखनीय है कि प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम अकादमिक दुनिया के साथ-साथ सक्रिय राजनीति में भी एक बड़ा नाम हैं। वह वर्तमान में मणिपुर की इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस पार्टी के निर्वाचित सांसद (Member of Parliament) हैं। जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय में एक वरिष्ठ प्रोफेसर और सांसद के खिलाफ इस तरह के गंभीर आरोपों में हुई यह कार्रवाई शैक्षणिक गलियारों और राजनीतिक हलकों में चर्चा का बड़ा विषय बन गई है।

विश्वविद्यालय प्रशासन के इस कदम को परिसरों में महिलाओं की सुरक्षा और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। हालांकि, इस बर्खास्तगी के बाद राजनीतिक और कानूनी स्तर पर क्या प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

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