बेतिया के बलुआ पंचायत में 78 साल बाद बिजली पहुंचेगी, जनवरी तक ग्रामीणों को मिलेगी रोशनी

News Saga Desk

बेतिया जिले के बलुआ पंचायत के कई गांव आज भी सूरज उगने के बाद और ढलने से पहले ही खाना बनाने को मजबूर हैं, क्योंकि स्वतंत्रता के 78 साल बाद भी यहां बिजली नहीं पहुंची थी। 5जी के युग में भी गांव के लोग की-पैड मोबाइल इस्तेमाल करते हैं और पढ़ाई के लिए रात में दीपक या ढेबरी पर निर्भर रहते थे।

हालांकि अब विभाग ने बिजली आपूर्ति शुरू करने के अंतिम चरण में काम तेज कर दिया है। मधुबनी सब-ग्रिड से बिजली आपूर्ति के लिए दियारा में पोल लगाने का कार्य लगभग पूरा हो गया है, जबकि ट्रांसफार्मर लगाने और फिनिशिंग का काम अंतिम चरण में है।

गांव के मुखिया ने बताया कि बिजली ना होने के कारण मिट्टी का तेल भी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता था, जिससे लोगों को काफी कठिनाई होती थी। इसके चलते लोग सूरज उगने से पहले और डूबने से पहले ही भोजन बना लेते थे, और बच्चों की पढ़ाई रात में सीमित रोशनी पर निर्भर थी।

यह कदम तत्कालीन विधायक धीरेंद्र प्रताप उर्फ रिंकू सिंह की पहल से शुरू हुआ था। चुनाव के समय काम रुका हुआ था, लेकिन अब विभाग सक्रिय हो गया है। बलुआ पंचायत के कई गांवों में गंडक नदी की दो धाराओं के बीच टावर लगाने का प्रस्ताव भी मंजूर हो गया है। तब तक सामान्य पोल से बिजली आपूर्ति की जाएगी।

विभाग ने ग्रामीणों से बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन करने की अपील की है। विभागीय जेई आदित्य राज ने बताया कि 15 जनवरी तक बलुआ में पूरी तरह से बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

बिजली न होने के कारण नल जल योजना सहित कई मुख्यमंत्री सात निश्चय योजनाओं में भी बाधा आई थी। अब बिजली आने से ग्रामीणों की कई समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद है।

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