देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो बीते कई दिनों से गंभीर परिचालन संकट में है। लगातार उड़ानें रद्द होने, देरी से उड़ान भरने और एयरपोर्ट पर भारी अव्यवस्था के कारण लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यह संकट नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों के लागू होने के बाद शुरू हुआ और धीरे-धीरे पूरे देश के विमानन तंत्र को प्रभावित करने लगा। अब DGCA, केंद्र सरकार और अन्य एयरलाइंस सक्रिय हो चुकी हैं, और कई बड़े कदम लगातार उठाए जा रहे हैं।
संकट की शुरुआत — FDTL के नए नियम बने कारण
जनवरी और मार्च 2024 में जारी किए गए FDTL के नए नियमों का दूसरा चरण 1 नवंबर को लागू हुआ। इसमें:
- पायलटों के साप्ताहिक विश्राम को 48 घंटे कर दिया गया
- रात की उड़ानों में केवल दो लैंडिंग की अनुमति
- लगातार दो रातों की ड्यूटी पर रोक
- सुबह और रात की उड़ानों की समय-सीमा बदल दी गई
इंडिगो की अधिकतर उड़ानें रात/सुबह के समय होती हैं, इसलिए एयरलाइन को सबसे ज्यादा झटका लगा। एयरलाइन ने DGCA को बताया कि नए नियमों के लिए तैयारी कमजोर रही और पायलटों की संख्या जरूरत से कम पड़ गई।
पहला बड़ा झटका – 1,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द
पहले सप्ताह में ही एक ही दिन 1,000 से अधिक उड़ानें रद्द हुईं। देशभर के एयरपोर्ट—दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, अहमदाबाद, कोलकाता, पटना—पर अफरा-तफरी मच गई। हजारों यात्री फंस गए, बैगेज मिसहैंडलिंग बढ़ी और कई प्रमुख रूट्स पर किराए भी अचानक बढ़ने लगे।
बोर्ड की आपात बैठक और CMG का गठन
इंडिगो बोर्ड ने हालात बिगड़ने पर आपात बैठक की और एक क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप (CMG) गठित किया। यह ग्रुप ऑपरेशंस की निगरानी, रोस्टर और नेटवर्क रीबूट करने के साथ रोजाना समीक्षा करेगा। CMG में बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य और CEO शामिल हैं।
DGCA ने इंडिगो को ऑपरेशन स्थिर करने के लिए बड़ी अस्थायी राहत दी है। अब रात का समय 12 से 5 बजे तक माना जाएगा और 6 नाइट लैंडिंग की अनुमति मिलेगी। एयरलाइनों के लिए 48 घंटे साप्ताहिक विश्राम नियम हटाया गया है, और इंडिगो के लिए 12 FOI अधिकारी तैनात किए गए हैं। DGCA ने स्पष्ट किया कि ये छूट सुरक्षा से समझौता नहीं बल्कि ऑपरेशन स्थिरता के लिए हैं। एयरलाइन को हर दो सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट और 30 दिनों में नया अनुपालन प्लान देना होगा।
पायलट संघों की नाराजगी बढ़ी
इंडिगो संकट के पांचवें दिन हालात अभी भी सामान्य नहीं हो पाए हैं। पायलट संघ (ALPA India) ने DGCA द्वारा दी गई अस्थायी छूट पर कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह छूट सुरक्षा से समझौता है और पायलटों की कमी को “कृत्रिम संकट” बताकर नियम कमजोर किए गए हैं। संघ ने DGCA से इस छूट को तुरंत वापस लेने और एयरलाइन पर कार्रवाई की मांग की है।
इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक स्वरूप ले लिया है। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि एयरलाइंस में एकाधिकार (मोनोपॉली) मॉडल को बढ़ावा दिया गया, जिससे यात्रियों को भारी नुकसान हुआ। विपक्ष का सवाल है कि नए FDTL नियमों को लागू करने से पहले DGCA ने एयरलाइंस की तैयारी, रोस्टर और पायलट उपलब्धता की गहन समीक्षा क्यों नहीं की।
उधर, संकट बढ़ते ही अन्य एयरलाइनों ने किराए में भारी बढ़ोतरी कर दी। कई रूट्स पर टिकट के दाम 80,000 से 90,000 रुपये तक पहुंच गए, जिससे यात्रियों में नाराजगी बढ़ी। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सरकार को दखल देना पड़ा और दूरी के आधार पर नई अधिकतम किराया सीमा लागू कर दी। नई सीमा के अनुसार, 0 से 500 किलोमीटर तक का किराया अधिकतम 7,500 रुपये, 500 से 1,000 किलोमीटर तक 12,000 रुपये, 1,000 से 1,500 किलोमीटर तक 15,000 रुपये और 1,500 किलोमीटर से अधिक दूरी का किराया 18,000 रुपये से ऊपर नहीं जा सकेगा। यह नियम 6 दिसंबर से प्रभावी हो गया। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी राहत देते हुए किराया सीमा लागू की, कैंसिलेशन और रीशेड्यूलिंग शुल्क माफ किए तथा अतिरिक्त उड़ानें बढ़ाईं।
देशभर में उड़ानें रद्द होने का सिलसिला लगातार जारी है। दिल्ली एयरपोर्ट पर 86 उड़ानें रद्द हुईं, हैदराबाद में 69 योजनाबद्ध कैंसिलेशन हुए, कोलकाता में 41 और अहमदाबाद में करीब 59 उड़ानें प्रभावित हुईं। पटना एयरपोर्ट पर भी 16 उड़ानें रद्द की गईं। कुल मिलाकर पांचवें और छठे दिन लगभग 800 से अधिक उड़ानें रद्द हुईं, जिससे यात्रियों की परेशानी स्पष्ट दिखी।
इंडिगो ने राहत की घोषणा करते हुए कहा है कि 5 से 15 दिसंबर तक कैंसिलेशन या रीशेड्यूलिंग पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और सभी रद्द टिकटों का ऑटो-रिफंड किया जाएगा। एयरलाइन का कहना है कि नेटवर्क और रोस्टर को रीबूट किया जा रहा है तथा 10 से 15 दिसंबर के बीच स्थिति को सामान्य करने का प्रयास जारी है।
पूरे घटनाक्रम को देखें तो स्पष्ट है कि नए FDTL नियमों की तैयारी कमज़ोर रही। रात और सुबह की उड़ानों पर अत्यधिक निर्भरता ने संकट को बढ़ाया, पायलटों की संख्या नियमों के अनुपात में कम पड़ी और DGCA के देर से हस्तक्षेप ने अव्यवस्था बढ़ा दी। यात्रियों का विश्वास प्रभावित हुआ और अब DGCA की ओर से बनाई गई कमेटी 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
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