झारखंड के सिमडेगा जिले में रूबेला वायरस का पहला मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। जानें रूबेला के लक्षण, बचाव और टीकाकरण अभियान से जुड़ी पूरी जानकारी।
झारखंड में रूबेला (जर्मन खसरा) का पहला मामला सामने आने से राज्य के स्वास्थ्य महकमे में हलचल मच गई है। सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड स्थित मुंडाटोली गांव की एक 10 वर्षीय बच्ची में रूबेला संक्रमण की पुष्टि हुई है। बच्ची के ब्लड सैंपल की जांच रांची स्थित रिम्स (RIMS) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में की गई थी, जिसके बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

राज्यस्तरीय वॉर रूम गठित, एक्टिव केस की तलाश जारी
पहला मामला सामने आते ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), झारखंड ने संक्रमण के प्रसार को रोकने और स्थिति पर काबू पाने के लिए राज्यस्तरीय वॉर रूम स्थापित किया है। इसके साथ ही, प्रभावित क्षेत्रों में एक्टिव केस की खोज (Active Case Finding) और निगरानी तेज कर दी गई है। राज्य टीकाकरण पदाधिकारी विजय किशोर रजक के अनुसार, स्थानीय स्वास्थ्य संस्थानों को लाइन लिस्ट अपडेट करने और रोकथाम के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।
खसरे के 15 मरीज मिले, 5 साल तक के बच्चों का विशेष टीकाकरण
राज्य में रूबेला के अलावा खसरे (Measles) से पीड़ित 15 मरीज भी मिले हैं, जिनमें पूर्वी सिंहभूम, पाकुड़ और पश्चिम बंगाल से सटे जिले शामिल हैं। सिमडेगा के सिविल सर्जन ने मुंडाटोली (कुड़पानी स्वास्थ्य उपकेंद्र) में 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों के लिए विशेष एमआर (MR) टीकाकरण अभियान चलाने का निर्देश दिया है। इस दौरान छूटे हुए और पेंडिंग डोज वाले बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर टीका लगाया जाएगा, जबकि दोनों डोज ले चुके बच्चों को भी गाइडलाइंस के तहत अतिरिक्त डोज दी जाएगी।
2026 तक उन्मूलन का राष्ट्रीय लक्ष्य
भारत सरकार ने देश से खसरा और रूबेलाको पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य वर्ष 2026 निर्धारित किया है। पूर्व में यह लक्ष्य 2023 रखा गया था, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसमें बदलाव किया गया। रूबेला एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने की बूंदों से फैलती है।
- प्रमुख लक्षण: हल्का बुखार, सिरदर्द, आंखों में लालिमा और शरीर पर गुलाबी चकत्ते या दाने होना।
- गर्भवती महिलाओं के लिए जोखिम: गर्भावस्था के दौरान रूबेला संक्रमण होने पर शिशु में ‘कंजेनिटल रूबेला सिंड्रोम’ (CRS) का खतरा रहता है, जिससे नवजात में बहरापन, आंखों की समस्याएं और गंभीर जन्मजात विकृतियां हो सकती हैं।
समय पर मिजल्स-रूबेला (MR) का टीका लगवाना ही इस घातक संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
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