बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। पटना हाईकोर्ट ने 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान अपने चुनावी हलफनामों में कथित तौर पर गलत या अधूरी जानकारी देने के आरोप में 42 विधायकों को नोटिस जारी किया है। इस कार्रवाई ने राज्य के सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों में हलचल मचा दी है।
आरोप और याचिकाएं
याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि कुछ विधायकों ने अपने हलफनामों में संपत्ति और देनदारियों की सही जानकारी नहीं दी, आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं किया, और जरूरी तथ्यों को छिपाया। याचिकाएं उन उम्मीदवारों ने दाखिल की हैं, जो 2025 विधानसभा चुनाव में हार गए थे। उनका दावा है कि विजेता उम्मीदवारों ने गलत जानकारी देकर चुनाव जीता, इसलिए उनकी जीत को चुनौती दी गई है।
हाईकोर्ट का रुख
कोर्ट ने कहा कि चुनावी हलफनामा लोकतंत्र का अहम दस्तावेज है और मतदाताओं को उम्मीदवार के बारे में सही जानकारी मिलना जरूरी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए सभी 42 विधायकों से जवाब तलब किया है।
नोटिस प्राप्त विधायकों में प्रमुख नाम
नोटिस पाने वालों में कई बड़े नाम शामिल हैं, जिनमें बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार, ऊर्जा मंत्री विजेंद्र यादव, पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा, चेतन आनंद, अभिषेक रंजन और अमरेंद्र प्रसाद शामिल हैं।
संभावित परिणाम
हाईकोर्ट ने सभी विधायकों को तय समय में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट सबूत और दलीलों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगा। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो इन विधायकों की सदस्यता खतरे में पड़ सकती है और उनकी सदस्यता रद्द होने पर फिर से चुनाव कराए जा सकते हैं।
यह मामला राज्य की राजनीति में बड़े भूचाल का कारण बन सकता है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक परिणाम महत्वपूर्ण होंगे।
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