रेबीज मुक्त झारखंड मिशन के तहत 2029 तक राज्य को रेबीज मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया गया। रांची में आयोजित कार्यशाला में सामूहिक टीकाकरण और पशु जन्म नियंत्रण पर जोर दिया गया।
रेबीज मुक्त झारखंड मिशन को गति देने के उद्देश्य से रांची में पशु कल्याण बोर्ड के तत्वावधान में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में वर्ष 2029 तक झारखंड को रेबीज मुक्त राज्य बनाने का संकल्प लिया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने सामूहिक टीकाकरण अभियान, पशु जन्म नियंत्रण (ABC) कार्यक्रम और जनजागरूकता को इस लक्ष्य की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
राजधानी रांची स्थित पशुपालन निदेशालय के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में पशुपालन विभाग, नगर निगम, पुलिस प्रशासन, जिला एवं प्रखंड स्तर के अधिकारियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और पशु कल्याण से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

सामूहिक टीकाकरण से बनेगा रेबीज मुक्त झारखंड
रेबीज मुक्त झारखंड मिशन के तहत मुख्य अतिथि एवं पशुपालन विभाग के निदेशक रॉबिन टोप्पो ने कहा कि बड़े पैमाने पर रेबीज-रोधी टीकाकरण अभियान चलाकर राज्य को रेबीज मुक्त बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण ही सबसे प्रभावी, मानवीय और कानूनी उपाय है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों और संस्थाओं से मिलकर अभियान को सफल बनाने की अपील की।
कार्यशाला में पशु जन्म नियंत्रण पर विशेष चर्चा
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर रहने वाले आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करना, मानव और पशु के बीच होने वाले संघर्ष को कम करना तथा पशु जन्म नियंत्रण नियम-2023 (ABC Rules 2023) का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना था।
तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने पशुओं को मानवीय तरीके से पकड़ने, नसबंदी से पहले और बाद की देखभाल तथा निर्धारित नियमों के पालन पर विस्तार से जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने साझा किए महत्वपूर्ण सुझाव
रेबीज मुक्त झारखंड मिशन को सफल बनाने के लिए आयोजित संवाद सत्र में प्रतिभागियों के सवालों का विशेषज्ञों ने जवाब दिया।
एनिमल वेलफेयर बोर्ड के डॉ. आर.बी. चौधरी और डब्ल्यूवीएस (WVS) के क्लीनिकल डायरेक्टर एवं टास्क फोर्स मैनेजर डॉ. ए. कुमार ने रेबीज संक्रमण, बचाव के उपाय, टीकाकरण की आवश्यकता और पशु कल्याण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी।
जनजागरूकता अभियान पर रहेगा फोकस
कार्यशाला में यह भी निर्णय लिया गया कि रेबीज की रोकथाम के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत नागरिकों को पशुओं के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने, पशु क्रूरता रोकने और रेबीज से बचाव के उपायों की जानकारी दी जाएगी।
साथ ही शहरी क्षेत्रों में कुत्तों के लिए निर्धारित फीडिंग पोस्ट विकसित करने और स्थानीय स्तर पर मानव-पशु संघर्ष कम करने की दिशा में भी कार्य करने पर सहमति बनी।
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‘पशु मित्र’ पुस्तक का हुआ विमोचन
कार्यक्रम के दौरान ‘पशु मित्र’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इस पुस्तक में पशुओं और मनुष्यों के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने, पशु कल्याण के सिद्धांतों और रेबीज से बचाव के उपायों से जुड़ी उपयोगी जानकारी शामिल की गई है।
आयोजकों का मानना है कि यह पुस्तक आम लोगों में जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, रेबीज एक गंभीर लेकिन पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी है। समय पर टीकाकरण, आवारा कुत्तों की नसबंदी और जनजागरूकता के माध्यम से इसके मामलों में प्रभावी कमी लाई जा सकती है। इसी उद्देश्य से झारखंड में रेबीज मुक्त झारखंड मिशन को आगे बढ़ाया जा रहा है।
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