News Saga Desk
कोलकाता | पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने आम लोगों पर कर का अतिरिक्त बोझ डाले बिना राज्य के स्वयं के कर राजस्व में वृद्धि का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए सरकार ने कर संग्रह व्यवस्था में मौजूद खामियों को दूर करने और राजस्व रिसाव रोकने पर विशेष जोर दिया है।
राज्य वित्त विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में राज्य के स्वयं के कर राजस्व को बढ़ाने के लिए अलग से विस्तृत प्रावधान नहीं होने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, सरकार का मानना है कि कर संग्रह में होने वाली गड़बड़ियों को रोकना ही राजस्व बढ़ाने का प्रमुख माध्यम बनेगा।
सरकार ने पत्थर खदानों और बालू खनन कारोबार में कर संग्रह प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। खास तौर पर इलेक्ट्रॉनिक चालान में फर्जीवाड़े की संभावनाओं को समाप्त करने की तैयारी की जा रही है। पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस शासन के दौरान इलेक्ट्रॉनिक चालान में कथित फर्जीवाड़े के जरिए कर चोरी की शिकायतें सामने आती रही थीं।
शुभेंदु सरकार ने बताया कि राज्य सरकार का लक्ष्य राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि करना है, ताकि आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसी प्राथमिक योजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन सुनिश्चित किए जा सकें। उन्होंने अधिकारियों को करदाताओं के लिए सुविधाजनक व्यवस्था विकसित करने का भी निर्देश दिया, जिससे स्वैच्छिक कर भुगतान को प्रोत्साहन मिले।
बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने कर संग्रह की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों की जानकारी दी। मंत्री ने लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे, कर आधार के विस्तार और नई तकनीकों के उपयोग पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रभावी निगरानी और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से कर संग्रह में होने वाले रिसाव को रोका जा सकेगा तथा राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे झारखंड के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।
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