News Saga Desk
अमेरिका और इज़राइल के साथ ईरान का युद्ध अब 39 दिनों से लगातार जारी है। दोनों पक्षों के हमले बढ़ते जा रहे हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि मंगलवार रात तक होर्मुज जलमार्ग पर आवाजाही बहाल नहीं होती, तो अमेरिकी सेना ईरान के पावर प्लांट और पुलों पर हमला कर सकती है।
ईरान ने नागरिकों से सुरक्षा में मदद मांगी
ट्रंप की धमकी के बाद ईरान ने युवाओं, खिलाड़ियों, कलाकारों और छात्रों से अपील की है कि वे पावर प्लांट और पुलों के आसपास मानव श्रृंखला बनाकर सुरक्षा में मदद करें। अमेरिकी राष्ट्रपति पहले भी ईरान को “पाषाण काल” में भेजने की धमकी दे चुके हैं।
युद्धविराम प्रस्ताव खारिज, स्थायी समाधान की मांग
6 अप्रैल को तेहरान ने अमेरिका के 45 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया। ईरान का कहना है कि वह केवल स्थायी युद्ध समाप्ति स्वीकार करेगा, जिसमें दोबारा हमला न हो और प्रतिबंध हटाए जाएं। काहिरा स्थित ईरानी राजनयिक मिशन के प्रमुख मोजतबा फरदौसी पोर ने कहा कि वे केवल तभी युद्ध का अंत स्वीकार करेंगे जब उन्हें गारंटी मिले कि देश पर फिर हमला नहीं होगा।
मिडिल ईस्ट में खतरे की चेतावनी
अटलांटिक काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार यदि अमेरिका पावर प्लांट और पुलों पर हमला करता है, तो मिडिल ईस्ट का युद्ध और तेज हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट करना रणनीतिक रूप से बेअसर और मानवीय दृष्टि से खतरनाक है।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य देशों की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत नागरिक ढांचे पर हमला प्रतिबंधित है। वहीं न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भी ट्रंप से अपील की है कि पुलों और नागरिक ढांचे पर बमबारी न की जाए, क्योंकि इससे आम नागरिकों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा।
कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीद
हालांकि ईरान ने अमेरिका के ताजा प्रस्ताव को खारिज किया है, लेकिन वार्ता जारी है। ट्रंप ने भी कहा कि ईरान से बातचीत जारी है। अगर कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं, तो मिडिल ईस्ट में संघर्ष कम होने की संभावना बनी हुई है।
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