NewsSaga Desk
खूंटी | पिछले तीन महीने से आफत बन कर बरस रहे बारिश ने खूंटी जिले की सूरत बिगाड़ कर रख दी है। फसले तो बर्बाद हुई ही, सड़कों के और पुल-पुलियों के टूटने के कारण आवागमन पर भी काफी बुरा असर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आवागमन की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो खूंटी-सिमडेगा मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो सकता है।
भारी बारिश और कमजोर निर्माण के कारण गत 19 जून को खूंटी-तोरपा-कोलेबिरा मुख्य सड़क पर पेलौल गांव के पास बनई नदी पर बना पुल टूट गया था। कुछ दिनों कें बाद डोड़मा-सिसई पथ पर छाता नदी पर बना डायवर्सन भी टूट गया। लगभग दो माह बीत जाने के बाद भी बनई नदी पर न तो डायवर्सन बना और न ही पुल निर्माण हुआ।
इस कारण वाहनों का आवागमन काफी मुश्किल हो गया है। पुल के टूटने से झारखंड, ओड़िशा, बंगाल और छत्तीसगढ़ राज्यों की गाड़ियों को वैकल्पिक रास्तों से होकर गुजरना पड़ रहा है। अंगराबारी-तुपुदाना भाया जुरदाग पथ, जुरदाग-कुंजला पथ, मुरहू-तपकरा पथ, खूंटी-माहिल-घाघरा-बिचना पथ, तोरपा-कर्रा-रांची भाया बाला मोड़, जलटंडा-वन गानालोया भाया भोंडा पथ समेत अन्य सड़कों से भारी वाहनों का परिचालन हो रहा है।
लगातार भारी वाहनों का परिचालन होने से अब ये वैकल्पिक सड़कें भी टूटने लगी हैं। जगह-जगह गड्ढ़े बन गए हैं और फ्लैंक पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। फ्लैंक की जगह दोनों ओर बने गड्ढ़ों की वजह से वाहन चालक सड़क से नीचे वाहन उतारने से भी बच रहे हैं, क्योंकि गाड़ियों के फंसने का डर बना रहता है। अंगराबारी-तुपुदाना पथ पर बेड़ा पुल के पास मिट्टी का काफी कटाव हो गया है। इसके कारण सड़क खतरनाक हो गई है। कभी भी वहां कोई हादसा हो सकता है। कुछ वर्षों पूर्व माहिल-गानालोया के बीच बनई नदी पर बना पुल दब चुका था, जिसकी मरम्मत कराई गई थी। अब इस पुल से होकर कई भारी वाहनों के गुजरने और पुल के नीचे से बालू के अवैध उत्खनन से इस पुल पर भी टूटने का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल टूटने के बाद से लगातार समस्या बढ़ती जा रही है। अब कई ग्रामीण सड़कें भी टूट चुकी हैं और दिन-ब-दिन इनकी स्थिति और बिगड़ रही है।
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