रांची में पुलिस पर हमला; थाना प्रभारी सहित 2 घायल:जमीन विवाद सुलझाने गई थी

News Saga Desk

रांची। राजधानी रांची से सटे लापुंग के कोयनारा गांव में पुलिस की टीम पर हमला किया गया। पुलिस पर हमला तब हुआ जब टीम 55 एकड़ 56 डिसमिल जमीन का विवाद सुलझाने गई थी। पुलिस के साथ मारपीट पड़हा के लोगों ने हमला कर दिया।

उग्र लोगों ने थाना प्रभारी से हाथापाई की। डंडे से पीटा। थाना प्रभारी जमीन पर गिर पड़े तो कुछ युवकों ने तलवार से हमला करने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने फायरिंग की। इस घटना में थाना प्रभारी संतोष कुमार यादव और दो जवान लालू उरांव व पुनई लोहरा घायल हो गए।

दो स्थानीय लोग भी हुए घायल

पुलिस पर हुए हमले के दौरान बचाव में पुलिस ने गोली चलाई। इससे जातालोया कुसुम टोली निवासी 22 वर्षीय जतरू मुंडा और 45 साल की बिरस उरांव घायल हैं। जतरू को एक गोली जांघ में और एक पेट में लगी है। वहीं बिरस की हथेली में गोली लगी है।

इधर, थाना प्रभारी सहित अन्य पुलिसकर्मियों को रांची के राज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डीआईजी सह एसएसपी चंदन सिन्हा अस्पताल पहुंचे और घायल पुलिसकर्मियों से मिले। उन्होंने कहा कि पूर्व नक्सली पुनई उरांव के इशारे पर यह हमला किया गया है।

जमीन विवाद सुलझाने के दौरान ग्रामीण आक्रोशित हो गए। जिसके बाद पूरी घटना घटी।

जमीन विवाद सुलझाने के दौरान ग्रामीण आक्रोशित हो गए। जिसके बाद पूरी घटना घटी।

हमले के पीछे जमींदारी जमीन का विवाद

घटना को लेकर मुखिया धुचला मुंडा और डॉ. बोने उरांव ने कहा के हुरहुरी के पूर्व जमींदार लाल सत्यनारायण नाथ शाहदेव ने कोयनारा की 55 एकड़ 56 डिसमिल जमीन (खाता नंबर एक, दो व चार) 1964 में हटिया से विस्थापित लेदे उरांव को बेच दी थी।

इस जमीन का पट्‌टा, डीड ग्रामीणों के पास है। अब पूर्व जमींदार के वंशज गांव के बंधन लोहरा को पावर ऑफ अटॉर्नी देकर ​दलालों से जमीन बिकवा रहे हैं। जमीन मालिक और उसके वंशजों को खेती करने नहीं दिया जा रहा है।

जिस जमीन को लेकर विवाद, वह खतियानी

लाल वैभव नाथ शाहदेव ने कहा कि यह उनकी खतियानी जमीन है। उन्होंने या उनके पूर्वजों ने कभी कोई जमीन नहीं बेची। जो ग्रामीण खेती-बाड़ी करते हैं, वे उस पर दावेदारी कर रहे हैं। ग्रामीण जो कागजात दिखा रहे हैं, वह फर्जी है।

ग्राम सभा के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद थी।

ग्राम सभा के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद थी।

पुनई उरांव और बोने उरांव सहित कुछ लोग पड़हा के नाम पर जमीन हथियाना चाहते हैं। मंगलवार को इसे लेकर ग्राम सभा हो रही थी। पड़हा के लोगों ने उन्हें बुलाया था। लेकिन थाना प्रभारी ने हमें आने से मना कर दिया। मैं रास्ते से लौट गया, वरना अनर्थ हो सकता था।

जमीन कब्जे के लिए संगठन के लोग हुए जमा

लाल वैभव नाथ शाहदेव ने कहा कि एक विवादित जमीन पर कब्जे के लिए संगठन के नाम पर काफी लोग जमा हो गए थे। कुछ लोग जमीन कब्जा करने का गिरोह चलाते हैं। उसी गिरोह ने हमला किया है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

वहीं डीएसपी अशोक कुमार राम ने बताया कि पड़हा के नाम पर वहां असामाजिक तत्व जमा थे। उग्र भीड़ ने थाना प्रभारी और पुलिसकर्मियों को काफी दूर तक खदेड़ा। अगर पुलिस के जवान आत्मरक्षा में गोली नहीं चलाती तो थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों की जान चली जाती। इसलिए पुलिस को मजबूरी में फायरिंग करनी पड़ी।

पुलिस को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी।

पुलिस को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी।

पूर्व नक्सली हमले का मास्टरमाइंड

इधर, पुलिस जांच में पता चला कि पुलिस पर हमले का मास्टरमाइंड पहले नक्सली रह चुका है। उसी के इशारे पर हमला किया गया है। उसके साथ कुछ स्थानीय नेता भी हैं। संगठन में कई ऐसे लोग हैं, जो पहले नक्सली संगठन में सक्रिय थे। फिलहाल अलग संगठन बनाकर विवादित जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। 10 से ज्यादा नामजद समेत अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।


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