केदारनाथ में हेलिकॉप्टर हादसों का सिलसिला: 5 दुर्घटनाएं, 13 मौतें—तकनीकी खामी या मानवीय चूक? जानिए उड़ान की पूरी तकनीक

News Saga Desk

नई दिल्ली। इस साल केदारनाथ इलाके में हेलिकॉप्टर क्रैश या इमरजेंसी लैंडिंग से जुड़ी कुल 5 घटनाएं सामने आईं हैं। क्रैश हुए हेलिकॉप्टर बेल कंपनी के हैं। वहीं इमरजेंसी और क्रैश लैंडिंग में एयरबस, अगस्ता वेस्टलैंड के हेलिकॉप्टर शामिल हैं। ये पायलट या हेलिकॉप्टर ऑपरेट करने वाली कंपनी की किसी गलती से हो रहा है, तकनीकी दिक्कत या खराब मौसम इसकी वजह है।

हादसे की 3 तस्वीरें देखिए…

17 मई 2025 को केदारनाथ जा रही एम्स ऋषिकेश की हेली एम्बुलेंस की क्रैश लैंडिंग हुई।

17 मई 2025 को केदारनाथ जा रही एम्स ऋषिकेश की हेली एम्बुलेंस की क्रैश लैंडिंग हुई।

7 जून 2025 को रुद्रप्रयाग में हाईवे पर हेलिकॉप्टर को आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी।

7 जून 2025 को रुद्रप्रयाग में हाईवे पर हेलिकॉप्टर को आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी।

15 जून 2025 को हेलिकॉप्टर केदारघाटी के पास क्रैश हो गया। इस पायलट समेत 7 की मौत हो गई।

15 जून 2025 को हेलिकॉप्टर केदारघाटी के पास क्रैश हो गया। इस पायलट समेत 7 की मौत हो गई।

अब के हेलिकॉप्टर की टेक्नोलॉजी

हेलिकॉप्टर के मुख्य हिस्से और उनका काम:

1. मेन रोटर ब्लेड: ये हेलीकॉप्टर को हवा में उठाने और दिशा देने का काम करते हैं। ब्लेड्स हवाई जहाज के पंखों जैसे एयरफॉइल होते हैं। जब ये तेजी से घूमते हैं, तो हवा को नीचे धकेलते हैं, जिससे लिफ्ट बनती है और हेलीकॉप्टर ऊपर उड़ता है।

पायलट ब्लेड्स के कोण को कलेक्टिव (सभी ब्लेड्स एकसाथ) या साइक्लिक (हर ब्लेड अलग-अलग) तरीके से बदलता है। इससे हेलीकॉप्टर ऊपर-नीचे, आगे-पीछे, या दाएं-बाएं जा सकता है। ये ब्लेड्स फ्लेक्सिबल होते हैं।

2. टेल रोटर: ये हेलिकॉप्टर की पूंछ पर लगा छोटा पंखा होता है, जो हेलिकॉप्टर को दिशा देने और स्थिर रखने का काम करता है। पायलट फुट पेडल्स से टेल रोटर के ब्लेड्स के कोण बदलता है, जिससे हेलिकॉप्टर दाएं या बाएं मुड़ पाता है।

3. इंजन: ये हेलिकॉप्टर का दिल है, जो इसे चलाने की ताकत देता है। ज्यादातर हेलिकॉप्टर्स में टर्बोशाफ्ट इंजन होता है, जो पावर को एक शाफ्ट के जरिए मेन रोटर और टेल रोटर तक भेजता है। ये जेट इंजन जैसा है, लेकिन हवा का धक्का देने की जगह शाफ्ट घुमाता है।

अब समझिए हेलिकॉप्टर उड़ता कैसे हैं…

हेलिकॉप्टर के रोटर ब्लेड तेजी से घूमते हैं और हवा को नीचे की तरफ धकेलते हैं। न्यूटन का एक नियम है- हर क्रिया की बराबर और उल्टी प्रतिक्रिया होती है। तो, जब ब्लेड हवा को नीचे धकेलते हैं, हेलिकॉप्टर को ऊपर की तरफ उठाने वाली ताकत मिलती है। बस यही लिफ्ट हेलिकॉप्टर को हवा में उड़ाती है।

अब, हेलीकॉप्टर को इधर-उधर, आगे-पीछे या ऊपर-नीचे ले जाने के लिए पायलट उन ब्लेड्स के कोण को बदलता है। मतलब, ब्लेड्स को थोड़ा तिरछा कर दो, तो हेलीकॉप्टर उस दिशा में जाता है। वहीं टेल रोटर हेलीकॉप्टर को दाएं-बाएं मोड़ने और एक जगह स्थिर रखता है। उसे इधर-उधर घूमने से रोकता है।


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