News Saga Desk
रांची। एजी को-ऑपरेटिव सोसाइटी कडरू में जमीन आवंटन में अनियमितताओं और धोखाधड़ी के मामले में सीआईडी ने जांच शुरू कर दी है। मामले में एफआईआर दर्ज कर एएसपी दीपक कुमार को जांच पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। एफआईआर में न्यू एजी कॉलोनी को-ऑपरेटिव सोसाइटी के अध्यक्ष कपिल देव गिरी, उनकी पत्नी कलावती बिहारी गिरी, पुत्र आशुतोष गिरी, एएन संडवार समेत अन्य कार्यकारिणी सदस्यों को आरोपी बनाया गया है।
क्या हैं आरोप?
सीआईडी के अनुसार, सोसाइटी के संचालकों ने नियमों का उल्लंघन कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीनों का आवंटन और हस्तांतरण किया। आरोप है कि पूर्व आवंटियों की भूमि को अवैध रूप से अधिग्रहित कर बेचा गया, जिससे कई लोगों को नुकसान हुआ।
एक ही परिवार को तीन प्लॉट
बायलॉज की धारा 45(2) के तहत एक परिवार को एक ही प्लॉट का प्रावधान है, लेकिन आरोप है कि कपिल देव गिरी और उनके परिजनों के नाम पर तीन प्लॉट आवंटित किए गए:
प्लॉट संख्या 182 – कपिल देव गिरी
प्लॉट संख्या 80 – कलावती बिहारी गिरी (पत्नी)
प्लॉट संख्या 191A – आशुतोष गिरी (पुत्र)
एफआईआर में यह भी उल्लेख है कि कपिल देव गिरी के निर्देश पर एक व्यक्ति को चार प्लॉट संयुक्त रूप से अवैध तरीके से हस्तांतरित किए गए।
विशेष मामलों में गंभीर शिकायतें
स्व. शशिभूषण मिश्रा:
उन्हें पूर्व भुगतान के बावजूद प्लॉट संख्या 192 का आवंटन नहीं किया गया। आरोप है कि इस प्लॉट को नियमों के खिलाफ जाकर सरदार प्रदीप सिंह को आवंटित कर दिया गया।
कमलकांत चौधरी (सेवानिवृत्त ऑडिट अफसर):
इन्हें पूर्व में प्लॉट संख्या 208A आवंटित किया गया था, लेकिन जमीन का हस्तांतरण नहीं हुआ। आरोप है कि दस्तावेजों में हेरफेर कर यह प्लॉट जयकृष्ण सिंह को दे दिया गया।
स्व. परमानंद झा:
इन्हें आवंटित प्लॉट संख्या 193 की सीमा में अतिक्रमण कर, इसके आसपास के तीन अन्य प्लॉट को मिलाकर बहुमंजिला इमारत बनाने की मंशा से हड़पने का प्रयास किया गया। आवंटित व्यक्ति को अब तक भूमि नहीं दी गई है।
आगे की कार्रवाई
सीआईडी मामले की गहराई से जांच कर रही है। जमीन घोटाले में शामिल सभी आरोपियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। साथ ही यह भी संकेत हैं कि और कई लोगों की संलिप्तता उजागर हो सकती है।
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