Bihar Election 2025: बिहारीगंज सीट पर कांग्रेस-राजद में टकराव, दिग्गजों के पाला बदलने से बढ़ी सियासी जंग

News Saga Desk

मधेपुरा। बिहारीगंज सीट पर महागठबंधन की स्थिति अबूझ पहेली बनती जा रही है। कांग्रेस पिछली बार की दावेदारी के आधार पर सीट चाह रही है, जबकि राजद स्थानीय प्रभाव और नए चेहरों के बल पर अपना दावा मजबूत कर रहा है। ऐसे में सीट बंटवारे को लेकर गठबंधन में तनाव गहराने लगा है।

पाला बदल कर राजद में आईं डॉ. रेणु कुशवाहा और कांग्रेस में शामिल हुए डॉ. रविंद्र चरण यादव जैसे दिग्गज नेताओं ने समीकरण और जटिल कर दिए हैं। 2009 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई बिहारीगंज विधानसभा सीट पर गठबंधन का पेंच फंसा है। एक तरफ जदयू की सिटिंग सीट होने के कारण एनडीए में किसी प्रकार का संदेह नहीं है। दूसरी तरफ आईएनडीआईए में राजद या कांग्रेस किसके पाले में यह सीट जाएगी, यह पेंच फंसा है।

कांग्रेस पिछले विस चुनाव का हवाला देकर इस सीट पर दावा जता रही है। दूसरी तरफ चर्चा यह है कि इस बार बिहारीगंज सीट पर राजद चुनाव लड़ेगा। राजद का तर्क है कि स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के मजबूत दावेदार नहीं हैं। गत चुनाव में कांग्रेस की प्रत्याशी रहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव की पुत्री सुभाषिणी लौटकर दोबारा बिहारीगंज नहीं आईं। राजद से इं. प्रभाष कुमार और पूर्व मुखिया मनोज यादव समेत अन्य कई लगातार क्षेत्र में डटे हैं। । बिहारीगंज विस सीट एनडीए गठबंधन में जदयू के खाते में है। इस वजह से एनडीए के दो कद्दावर राजद और कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं।

लोजपा (रा) की राष्ट्रीय महासचिव रहीं डॉ. रेणु कुशवाहा राजद की सदस्यता ले चुकी हैं। वे उदाकिशुनगंज विस सीट से 2005 के फरवरी व नवंबर और बिहारीगंज सीट से 2010 में विधायक चुनी गई थीं। 2010 में नीतीश सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं। इधर, पूर्व मंत्री डॉ. रविंद्र चरण यादव भाजपा से पाला बदलकर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। वे तब के उदाकिशुनगंज विस सीट से 1990, 95 और 2000 में यानी तीन बार विधायक रह चुके हैं।

बाद के दिनों में भाजपा में शामिल हुए। भाजपा के टिकट पर मधेपुरा से लोकसभा व बिहारीगंज से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। 2010 में बिहारीगंज विधानसभा सीट पर पहला चुनाव हुआ था, जिसमें जदयू ने जीत हासिल की थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में डॉ. रेणु कुशवाहा भाजपा में शामिल हुईं, जबकि 2015 के चुनाव में जदयू ने निरंजन मेहता को प्रत्याशी बनाया। 2020 में जब जदयू और भाजपा ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा, तब महागठबंधन से कांग्रेस की उम्मीदवार सुभाषिणी और जदयू के निरंजन मेहता के बीच सीधा मुकाबला हुआ, जिसमें निरंजन मेहता ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की।


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