News Saga Desk
सोनीपत | मयूर विहार के निवासी अरुण का शव गुरुवार रात हरियाणा के सोनीपत स्थित उसके गांव पहुंचा। शुक्रवार सुबह गांव में अंतिम संस्कार किया गया, जहां उसके बड़े भाई अंकुर ने मुखाग्नि दी। दाह संस्कार के दौरान परिवार के सदस्य रोते-बिलखते रहे। परिवार ने दावा किया कि अरुण निर्दोष था और गाजियाबाद पुलिस के एनकाउंटर में उसे गलत तरीके से फंसाकर मार दिया गया।
भाई अंकुर ने कहा कि उनका परिवार बेहद गरीब है, प्रशासन से लड़ने की ताकत नहीं है, इसलिए वे कोई केस नहीं करेंगे उन्होंने दावा किया कि पुलिस की जारी तस्वीरों में दिख रहे युवक उनका भाई नहीं है। अंकुर ने कहा कि अरुण शुगर का मरीज था, बेहद कमजोर था, जबकि तस्वीर में दिख रहे युवक से उसका मेल नहीं खाता। परिजनों ने अरुण को बेगुनाह ताते हुए एनकाउंटर को फर्जी करार दिया। मां सविता ने बताया कि बुधवार दोपहर बेटा हरिद्वार जाने की बात कहकर निकला था। जाते समय उसने कहा था कि वह गलत काम नहीं करता और अगले दिन लौट आएगा।
मां ने रोते हुए कहा कि राम-लक्ष्मण जैसी जोड़ी अलग हो गई, मेरा बेटा अब कभी नहीं लौटेगा। पिता राजेंद्र सिंह ने बताया कि अरुण पिछले पांच साल से शुगर का मरीज था और इंसुलिन पर निर्भर था। इसी कारण उसे बाहर नौकरी पर नहीं भेजा गया। एक साल पहले घर पर डयरी का छोटा कारोबार शुरू किया गया था, जिसमें अरुण पशुओं का दूध बेचने का काम करता था। गांव वालों और अंतिम संस्कार में शामिल लोगों ने भी कहा कि अरुण सीधा-साधा था और अपराधी गतिविधियों से उसका कोई लेना-देना नहीं था।
उन्होंने उच्च स्तरीय जांच की मांग की। पुलिस के अनुसार, गाजियाबाद में बुधवार शाम हरियाणा एसटीएफ, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और यूपी एसटीएफ ने रोहित गोदारा और गोल्डी बराड़ गैंग से जुड़े दो बदमाशों का एनकाउंटर किया था। इनमें एक रोहतक निवासी रविंद्र और दूसरा सोनीपत निवासी अरुण था। दोनों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। इधर अरुण के परिवार का कहना है कि उस पर कभी मारपीट तक का मामला दर्ज नहीं हुआ। वह पढ़ाई के बाद घर-परिवार के कामों में जुड़ा रहता था। परिवार की आर्थिक हालत कमजोर है और हाल ही में कर्ज लेकर मकान बनाया गया था।
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