News Saga Desk
हरिद्वार | आत्म निर्भरता का पहला सोपान है स्वावलंबन और स्वावलंबन साधना का महत्त्वपूर्ण कड़ी है उन्नति का आधार। यानि हमारी आत्मिक उन्नति-गायत्री साधना से भौतिक उन्नति-स्वावलंबन पर आधारित है।
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय परिसर में नवरात्र साधना के प्रथम दिन इसी भाव को मूर्त रूप से देते हुए साधना स्थली और स्वावलंबन के तहत पूजा आसन बुनाई तथा माला निर्माण के नवीन प्रकल्प का शुभारंभ हुआ।
इन प्रकल्पों का उद्घाटन देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या एवं शांतिकुंज व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। यह प्रकल्प गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा की जन्मशताब्दी वर्ष को समर्पित है तथा इसके माध्यम से आत्मनिर्भरता, श्रमसंस्कृति व साधना की आवश्यकताओं को एक साथ जोड़ा गया है।
इस अवसर डॉ चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि साधकों के लिए आसनों तथा मालाओं का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह प्रयास साधना में शुद्धता, श्रद्धा और संकल्प को और सुदृढ़ करेगा और स्वावलंबन आधारित यह प्रकल्प, पावन गुरुसत्ता की जीवन-दृष्टि को जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम बनेगा। यह समाज में परिश्रम, आत्मनिर्भरता और संस्कारों के समन्वय का एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करती है। युवा आइकॉन ने लोगों से इससे जुडकर स्वावलंबन, साधना और सेवा के इस त्रैविध पथ को अपनाने के प्रेरित किया।
यह प्रकल्प एक ओर साधना की गरिमा को बढ़ाएगा, तो दूसरी ओर स्वदेशी निर्माण और श्रमशीलता के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक ठोस कदम भी सिद्ध होगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षकगण, विद्यार्थी, साधकगण एवं शांतिकुंज परिवार के वरिष्ठ परिजन उपस्थित रहे।
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