विश्व दिव्यांगता दिवस पर झारखंड में काला दिवस आंदोलन

NEWS SAGA DESK

विश्व दिव्यांगता दिवस (3 दिसंबर 2025) के अवसर पर झारखंड दिव्यांग आंदोलन संघ के आह्वान पर प्रदेशभर में काला दिवस मनाया गया। प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश चौहान और उपाध्यक्ष यशवंत वर्मा के नेतृत्व में राजधानी रांची सहित विभिन्न जिलों में रैली, धरना और प्रदर्शन के माध्यम से सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई गई और जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। नेताओं ने कहा कि जैसे सामान्य नागरिकों के अधिकार मान्य हैं, वैसे ही दिव्यांग, वृद्ध और विधवा भी सम्मान और समान अधिकार के हकदार हैं। उन्होंने राज्य सरकार से संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित करने की मांग की। दिव्यांग जनों ने एकजुट होकर कहा कि वे तब तक संघर्ष जारी रखेंगे, जब तक सरकार उनकी गरिमा और अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाती।

रांची में विरोध प्रदर्शन

राजधानी रांची में राजभवन के समक्ष धरना दिया गया, जिसके बाद दिव्यांगजन ने राजभवन से फिरायलाल चौक तक पैदल मार्च किया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व ओम प्रकाश चौहान (चेयरमैन), जिन्हा महतो (कोषाध्यक्ष) और सुशील परजापति (वरिष्ठ पदाधिकारी) ने किया। नेताओं ने दोहराया कि दिव्यांग, वृद्ध और विधवा जनों को समान अधिकार और सुरक्षा देना राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

जिलों की मुख्य गतिविधियाँ

गोड्डा: दिव्यांग सहायता समिति के अशोक भगत, राजेश साह और मोहम्मद कालू के नेतृत्व में विशाल रैली निकाली गई और उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया।

गिरिडीह: दिव्यांग जन कल्याण संघ के मुंशी वर्मा, मोहम्मद नसीमुद्दीन, मोहम्मद अबिद, तय्यब रसूल, राजेश्वर तिवारी, हिमांशु गिरि और बसंती मंडल के नेतृत्व में मांग-पत्र सौंपा गया।

कोडरमा: दिव्यांग एकता संघ के पंकज पंडित, मोहम्मद तनवीर, मोहम्मद मुख्तार और पम्मी ने प्रदर्शन कर ज्ञापन प्रस्तुत किया।

गुमला: दिव्यांग एकता संघ के छोटेलाल महतो, आरिफ आलम और जितेंद्र उरांव के नेतृत्व में 5 सूत्री ज्ञापन सौंपा गया।

पांच सूत्री प्रमुख मांगे

1.  रोजगार एवं आर्थिक सुरक्षा

सरकारी सेवाओं में 4–5% आरक्षण का सख्ती से पालन

कौशल विकास, स्वरोजगार और स्टार्टअप के लिए विशेष वित्तीय सहायता

2. सामाजिक सुरक्षा

 दिव्यांग और विधवा पेंशन ₹1000 से बढ़ाकर ₹3000 प्रति माह

3 . पहचान एवं स्वास्थ्य सुरक्षा

 दिव्यांग प्रमाण पत्र प्रक्रिया को सरल और पूरी तरह ऑनलाइन किया जाए

मुफ्त दवाई, थेरेपी और नियमित स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था

4. शिक्षा अधिकार

 दिव्यांग छात्रवृत्ति में वृद्धि

सभी शिक्षण संस्थानों में रैम्प, सुलभ कक्षाएँ और सहायक उपकरण अनिवार्य

5. सुगम्यता एवं परिवहन सुविधा

 सरकारी भवनों, अस्पतालों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों में सुगम्यता मानकों का पालन

 सार्वजनिक परिवहन में रियायत और प्राथमिकता सुविधा लागू

यह आंदोलन राज्य में दिव्यांगजनों की आवाज को और मजबूत करता दिखा, जिसमें प्रदेशभर से व्यापक भागीदारी देखी गई।

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