NEWS SAGA DESK
रांची: झारखंड में ओबीसी छात्रों की लंबित छात्रवृत्ति को लेकर स्थिति गंभीर होती जा रही है। छात्रवृत्ति नहीं मिलने से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, वहीं सियासी तापमान भी तेजी से बढ़ रहा है। विपक्ष के दबाव में खड़ा कल्याण विभाग तकनीकी उलझनों में फंसा हुआ है। इस वर्ष केंद्र से प्री-मैट्रिक ओबीसी छात्रों के लिए मात्र 4 करोड़ रुपये मिले हैं, लेकिन तकनीकी कारणों से यह राशि वापस लौटने की स्थिति में है। नियमों के अनुसार जब तक केंद्र का हिस्सा राज्य को प्राप्त नहीं होगा, वित्त विभाग राज्य मद से भी भुगतान नहीं कर सकता। इसी कारण लम्बे समय से करीब 11 लाख ओबीसी छात्र छात्रवृत्ति से वंचित हैं।
केंद्र से मिलेगी राहत? मंत्री जल्द जाएंगे दिल्ली
आदिवासी कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने बताया कि छात्रवृत्ति अटकने की मूल वजह केंद्र-राज्य शेयरिंग सिस्टम है। उन्होंने कहा कि राज्य के पास बजट होने के बावजूद केंद्र की राशि नहीं आने से भुगतान संभव नहीं है। मंत्री ने कहा, “कक्षा 1 से 8 तक की छात्रवृत्ति राज्य मद से जाती है, इसमें परेशानी नहीं है और 70% भुगतान भी हो चुका है। समस्या वहीं गहराती है जहां केंद्र का हिस्सा जरूरी है।”
उन्होंने केंद्र सरकार की नई प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए, जिसके तहत अब राज्यों को राशि मांगनी होती है, तब केंद्र फंड भेजता है। मंत्री के अनुसार इससे प्रक्रिया और जटिल हो गई है और पहले से मिली 3-4 करोड़ की राशि भी वापस जाने की आशंका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेशन समाप्त होते ही वे दिल्ली जाकर केंद्र के अधिकारियों के साथ बैठक कर समाधान खोजने का प्रयास करेंगे।
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