News Saga Desk
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने धनबाद के गोल्फ ग्राउंड में आयोजित झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के 54वें स्थापना दिवस समारोह में शिरकत की। मंच पर मंत्री सुदिव्य सोनू और हफीजुल हसन सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने शहीदों की स्मृति में बने स्मारक पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी, वहीं मंच पर रखी दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तस्वीर पर भी फूल चढ़ाए। इस दौरान मंत्रियों और नेताओं ने गुरुजी को भारत रत्न दिए जाने की मांग उठाई।

समारोह में दूर-दराज के आदिवासी बहुल इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। पंडाल के बाहर भी भारी भीड़ देखी गई। यह पहला अवसर था जब गुरुजी स्वयं मंच पर मौजूद नहीं थे; उनकी जगह उनकी तस्वीर रखी गई। मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं ने मंच से गुरुजी के आंदोलन, संघर्ष और योगदान को याद किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भाजपा पर तीखा हमला बोला और असम में आदिवासियों की स्थिति का उल्लेख किया। उन्होंने कोयला खनन में लगी आउटसोर्सिंग कंपनियों में स्थानीय युवाओं को 75 प्रतिशत रोजगार सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि आउटसोर्सिंग कंपनियां स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं देतीं, तो उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
सीएम हेमंत सोरेन ने सभी को “जोहार” कहकर अभिवादन किया और कहा कि आज यह आदिवासी अभिवादन पूरे देश में पहचान बना रहा है। अपने लंदन दौरे का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वहां भी झारखंडी समुदाय ने उन्हें “जोहार” कहकर सम्मान दिया। नगर निकाय चुनाव के चलते आचार संहिता का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इस बार समारोह दिन में आयोजित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोल्फ ग्राउंड ऐतिहासिक महत्व का स्थल है, जहां से अलग राज्य, जल-जंगल-जमीन जैसे मुद्दों पर ऐतिहासिक घोषणाएं हुईं। उन्होंने गुरुजी को याद करते हुए कहा कि उनकी कमी सिर्फ झामुमो के लिए नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए अपूरणीय है। यह दिन गुरुजी को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ राज्य के विकास पर मंथन का भी अवसर है।
उन्होंने झारखंड आंदोलन के बलिदानों को याद करते हुए कहा कि अलग राज्य की लड़ाई में कई लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड ने देश को चलाने में भी अहम योगदान दिया है, लेकिन यहां के लोगों को लंबे समय तक अत्याचार, गरीबी और अशिक्षा का सामना करना पड़ा।
सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि अबुआ सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय शुरू किए गए, जहां निजी स्कूलों जैसी शिक्षा दी जा रही है। शिक्षकों की भर्ती हुई है, हॉस्टलों में भोजन की व्यवस्था की गई है और कोरोना काल में दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों को वापस लाया गया।
असम के चाय बागानों में आदिवासियों की स्थिति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के भीतर ही आदिवासियों पर अत्याचार हो रहा है और इसके खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष की जरूरत है।
धनबाद के कोयला क्षेत्र की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग कंपनियां बाहरी मजदूरों को ला रही हैं, जबकि नियमों के तहत 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार देना अनिवार्य है। यदि कंपनियां इसका पालन नहीं करतीं, तो उनके खिलाफ नियंत्रण और कार्रवाई जरूरी है।
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुजी भले ही आज मंच पर मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके दिखाए रास्ते पर चलकर राज्य को आगे बढ़ाने का संकल्प झामुमो सरकार का है। उन्होंने अग्निपथ योजना का भी जिक्र करते हुए कहा कि शहीद होने वाले अग्निवीरों के आश्रितों को सरकार रोजगार देगी।
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